Friday, August 29, 2014

अमर शहीदों की धरती - शाहजहांपुर ((44))

( पहियों पर जिंदगी 44)
उत्तर प्रदेश के रोहिलखंड इलाके में आने वाले शाहजहांपुर वह शहर है जहां से कई महान शहीदों की यादें जुड़ी हैं। 1857 की क्रांति से जुड़े रणबांकुरे शहीद अहमद उल्ला शाह और काकोरी कांड के शहीद अशफाक उल्ला खां का संबंध शाहजहांपुर से है। वहीं अमर शहीद राम प्रसाद बिस्मिल लंबे समय तक शाहजहांपुर के आर्य समाज मंदिर में रहे। बिस्मिल क्रांति के शायर थे। हम उनकी फड़कती हुई शायरी आज भी सुनते हैं।
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है....
देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है....
आजादी के आंदोलन के तीसरे बड़े शहीद ठाकुर रोशन सिंह भी शाहजहांपुर के निवासी थे।  


04 नवंबर 1993 - बिनोबा सेवा आश्रम शाहजहांपुर में ही हमारी सर्व धर्म प्रार्थना सभा हुई। बहुत लंबी साइकिल यात्रा के कारण सभी रेल यात्री लोग थक गए हैं। पर यात्रा के दौरान पहली बार हुआ है कि हमारे प्यारे भाई जी की सेहत भी खराब हो गई। सुब्बराव जी अचानक प्रार्थना कराते कराते बेसुध होकर लेट गए। उन्हें सख्त आराम की जरूरत थी। इसके बाद कोई सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं हुआ। हम सब लोग बसों से रेलवे स्टेशन लौट आए। रात्रि भोजन का इंतजाम रेलवे स्टेशन पर ही था। हालांकि शाम 6 बजे भोजन करने के थोड़ी देर बाद ही रात का खाना रास नहीं आया।


05 नवंबर 2014  एक दिन पहले की थकान और लंबी साइकिल यात्रा के बाद शाहजहांपुर में आज के सारे कार्यक्रम स्थगित कर दिए गए हैं। रेल यात्रा की सदभावना रैली का कार्यक्रम एक दिन का इतना ही रखा जाता है जिससे कि यात्री अगले दिन भी साइकिल चलाने लायक रहें। इसके लिए आदर्श तौर पर 12 से 15 किलोमीटर साइकिल यात्रा का कार्यक्रम रखा जाता है। दो तरफ की यात्रा लेकर ये दूरी 25 किलोमीटर तक हो जाती है। फिर हर राज्य के लोगों को साइकिल चलाने का स्टेमिना अलग अलग होता है। वैसे तो रेल यात्री के तौर पर उन्हीं लोगों को बुलाया जा रहा है जो युवा हों और साइकिले चला पाने में समर्थ हों। अगर कोई रास्ते में साइकिल चलाते हुए थक जाता है, तो परेशानी बढ़ जाती है। दूसरे सहयात्री उसकी मदद करते हैं। कई बार साइकिलें पंक्चर हो जाती हैं। कई बार उनकी चेन उतर जाती है। हालांकि हर रोज सुबह साइकिल यात्रा पर निकलने से पहले  अपनी अपनी साइकिलों की सभी यात्री जांच पड़ताल जरूर करते हैं। हमारे स्वंयसेवकों में से ही कुछ लोगो साइकिलों की मरम्मत का भी काम कर लेते हैं। वहीं हवा भरने के लिए पंप भी हमारे साथ होता है। ये 200 साइकिलें ट्रेन के आगे और पीछे स्थित अलग अलग दो ब्रेक वैन में लाद दी जाती हैं। हर स्टेशन पर उन्हें बाहर निकाला जाता है।

हम बात  शाहजहांपुर की कर रहे थे, यहां पर एक दिन पहले साइकिलों चलाने में दूरी की सारी सीमाएं टूट गईं। लिहाजा सभी यात्रियों को एक दिन का आराम दिया जाना जरूरी था। संयोग से शाहजहांपुर दो दिनों का पड़ाव था इसलिए आज का दिन आराम के लिए मुकर्रर किया जा सका। सुबह 10 बजे रेल यात्रियों की बैठक प्लेटफार्म पर ही हुई। इस दौरान  हर राज्य से आए यात्रियों ने सदभावना पर अपने विचार साझा किए।


vidyutp@gmail.com


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