Friday, August 22, 2014

आस्था की नगरी हरिद्वार में ((37))


( पहियों पर जिंदगी 37)
29 अक्तूबर 1993  सुबह हो गई है। हमारी ट्रेन हरिद्वार रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर तीन पर खड़ी है। हरिद्वार राष्ट्रीय युवा योजना के सौजन्य से मैं तीसरी बार पहुंच रहा हूं। उत्तरकाशी में भूकंप राहत शिविर में जाने से पहले और शिविर से लौटने के बाद हमलोग हरिद्वार में ही रुके थे। सुबह सुबह साइकिल रैली लंबी दूरी तय कर यराम आश्रम पहुंची।


यहां पर दोपहर का भोजन हुआ और छोटी सी सभा हुई। आश्रम में एक बेहतरीन संग्रहालय है जिसे मैंने टिकट खरीदकर देखा। शाम को हमारी रैली भारत माता मंदिर पहुंची। ये अत्यंत सुंदर बहुमंजिला राष्ट्र मंदिर है। इसमें देवी देवताओं की जगह भारत माता और आजादी की लड़ाई से जुड़े महापुरुषों की मूर्तियां हैं। देश में दो ही भारत माता मंदिर हैं। एक हरिद्वार में और दूसरा वाराणसी से काशी विद्यापीठ के परिसर में। भारत माता मंदिर में थोड़ा विश्राम का मौका मिला तो रेल यात्री पास में बहती गंगा की निर्मल धारा को देखने गए। मैं भी साथियों के साथ गंगा दर्शन के लिए गया। 



पंजाब के भाई अमनदीप सिंह और सतीश दुबारा आ चुके हैं। वे लोग कानपुर से संगरूर की आई बालिकाओं को वापस ले जाएंगे।
शाम की सभा भारत माता मंदिर में हुई जहां भाई जी के बहनोई मेजर ईश्वर जोइस ने सुब्बराव जी के परिवार का परिचय दिया। उन्होंने बताया- एस एन सुब्बराव जिनका पूरा नाम सेलम नानजुदैया सुब्बराव है, उनके पूर्वज तमिलनाडु के सेलम से कर्नाटक आए थे। वे स्थान परिवर्तन कर चिंतामणि के निकट आणेकर नामक ग्राम में आ गए। सुब्बराव जी के दादा जी अमलदार नामक पद पर कार्यरत थे। वे बड़े कुलीन परिवार और कुलीन खानदान से आते थे। सुब्बराव जी के पिता का नाम सेलम नानजुदैया था वे हाई कोर्ट में वकालत करते थे। वे बड़े ही ईमानदार वकील थे। बहुत कम कमाई के कारण कम खर्चे में किसी तरह परिवार का गुजारा चलता था। सुब्बराव जी के पांच भाई दो बहने हैं।

1 एस एन शिवस्वामी  मद्रास में विवाहित- एम एससी, असिस्टेंट डाइरेक्टर आल इंडिया रेडियो ( इनकी कोई संतान नहीं) 
2. एस एन चंद्रशेखर  कला और संगीत के क्षेत्र में रूचि, डेक्कन हेराल्ड अखबार के संपादक बने। इनकी पसंद की लड़की की शादी कहीं और हो गई तो आजीवन अविवाहित ही रहे।


3. प्रोफेसर नानजुदैया कृष्णास्वामी  विजया कॉलेज बेंगलुरू में लेक्चरार बने। बाद मे कॉलेज ऑफ मिलिट्री इंजीनयरिंग पुणे में भी पढ़ाया। अवकाश प्राप्त करने के बाद बेंगलुरु में रहते हैं। कई साल बाद साल 2016 में देखा की वे फेसबुक पर 90 साल से ज्यादा के उम्र में सक्रिय हैं। वे अपने छोटे भाई एस एन सुब्बराव से काफी स्नेह भाव रखते हैं। रोज उनकी खबर लेते रहते हैं।

4 श्रीमती सावित्री  सुब्बराव जी की बड़ी बहन। 
5 एसएन सुब्बराव  एलएलबी, एलएलएम ( 7 फरवरी 1929)
6. एस एन गणेशन - तबला वादक
7. उमा ईश्वर जोइस - ( इनका विवाह मेजर ईश्वर जोइस से हुआ है। 21 जून 2014 को वे हृदयाघात के बाद परलोक वासी हो गईं।)
हमें बेंगलुरु के आध्यात्मिक युवा शिविर के दौरान सुब्बराव जी के सभी भाई बहनों से मुलाकात करने का मौका मिला था। तब सुब्बराव जी ने एक भजन गाया था जहां एस एन गणेशन ने तबला वादन किया था।

भारत माता मंदिर की चौथी मंजिल पर सभा कक्षा है। यहां सभा में आज श्री मल्लिक आए हुए हैं। वे चंबल में डाकूओं के समर्पण के दौरान ग्वालियर हाईकोर्ट में न्यायाधीश थे। उन्होंने सत्तर के दशक में बागियों के दौर की चंबल की दास्तानें साझा कीं। उन्होंने कहा कि न्यायाधीश को बोलने का काम नहीं आता। वह सिर्फ सुनता रहता है।
भारत माता मंदिर के सामने विनोबा सेवा आश्रम में स्वामी नित्यानंद सरस्वती जी मिले। उत्तरकाशी भूकंप राहत शिविर के दौरान उनसे मेरी मुलाकात हुई थी। तब हम इसी आश्रम में रुके थे। उनसे बातें करके कई पुरानी स्मृतियां ताजी हो गईं। रात्रि भोजन समन्वय कुटीर में हुआ। भोजन के उपरांत सभी लोग रेलवे स्टेशन पर वापस आकर अपने अपने कोच में सो गए।


vidyutp@gmail.com

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