Friday, September 26, 2014

रात 12 बजे जब पानी हमारे होटल में घुसा ((13))

( जन्नत में जल प्रलय - 13 )
7 सितंबर की रात खाने का कोई प्रबंधन नहीं था। आसपास के सभी होटल रेस्टोरेंट बंद हो चुके थे। सरस मेला में हिस्सा लेने आए लोगों को एक शाम का भोजन मेला आयोजकों की ओर से उपलब्ध कराया जाता था। पर आयोजकों का फोन नहीं लग रहा था। वे हमसे भी बड़े संकट मे घिरे थे। हमारे होटल के प्रबंधक एजाज भाई ने कहा कि मैं सभी 250 लोगों को भोजन उपलब्ध कराउंगा। पास के किसी रेस्टोरेंट से बात कर उन्होंने फूड पैकेट बनवाए। होटल के हर कमरे में मौजूद लोगों को गिनती के हिसाब से फूड पैकेट उपलब्ध करा दिए गए। खाने के बाद सभी लोग अपने अपने अपने कमरे में जाकर सो गए। पर ज्यादा लोगों के आंखों में नींद नहीं थी। सभी दिल में किसी आने वाले खतरे का खौफ था।



बड़ी मुश्किल से सभी लोग अपने अपने कमरे में सोने की कोशिश कर रहे थे। अचानक रात के 12 बजे कई महिलाओं के चीखने चिल्लाने की आवाजें आने लगीं। मैं शोर सुनकर कमरे का दरवाजा खोल लॉबी में पहुंचा। श्रीनगर के पास कुपवाड़ा से आई बहने ऊंची आवाज में रो रही थीं। हमारे होटल के समाने वाली सड़क जो बांध के ऊपर की सड़क यानी पुश्ता है उसके ऊपर से पानी ओवर फ्लो कर हमारे होटल को डुबा रहा था। दरअसल झेलम दरिया का पानी दिन भर पूरे शहर को डुबोने के बाद डल झील के पास पहुंच चुका था। चैनल गेट से ओवर फ्लो होने के बाद पानी सड़क के ऊपर से गुजरता हुआ डल झील में जा रहा था। डल झील के जद में स्थित होटल रिट्ज चारों तरफ से डूबने लगा था।
पानी की धार देखते रामपुर के मसूद भाई। 


होटल में रह रहे कश्मीर, पंजाब, हरियणा, हिमाचल, दिल्ली, यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, ओडिशा, नागालैंड, मणिपुर, त्रिपुरा समेत देश के दूसरे राज्यों के तमाम लोग होटल की छत पर पहुंच कर पानी का ये कहर देखने लगे। अब सारी रात अंधेरे में जागते हुए कटी। पानी का शोर बढ़ता जा रहा था। हमारे होटल के आधार तल में पानी था जिसका स्तर धीरे धीरे बढ़ता जा रहा था। हमलोग चारों तरफ से पानी से घिर चुके थे। सुबह होने पर देखा होटल की पहली मंजिल पानी में थी।

मुझे अपने गांव के नहर का पुल याद आया जहां पानी ऊंचाई से बड़े वेग से नीचे गिरता था। वैसी ऊंची आवाज सड़क से गिर करह हमारे होटल की ओर आ रहा था। पेसफिक होटल की दीवार को पानी धीरे धीरे जख्मी कर रहा था। हमारे होटल के समाने वाली सड़क नहर में तब्दील हो गई थी। समाने खड़े आटो रिक्शा और कार पानी में डूब रहे थे।

सुबह होने पर उजाला तो हुआ पर पानी का कहर जारी रहा। होटल में मौजूद सारे लोग बुरी तरह डरे हुए थे। सड़क के ऊपर से आ रहे पानी का बहाव कम होने का नाम नहीं ले रहा था। हमारे होटल के आसपास के सभी होटल भी डूब रहे थे। हमारा होटल भी धीरे-धीरे डूबता जा रहा था। महिलाएं बच्चे और बुजुर्ग सभी खौफजदा थे।


-    विद्युत प्रकाश मौर्य  
FLOOD, KASHMIR SRINAGAR, CAPART, SARAS MELA ) 

1 comment:

  1. बेहद खौफज़दा करने वाला मंज़र रहा होगा :(

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