Monday, July 28, 2014

नेकचंद सैनी के साथ रॉक गार्डन में हम ((12))

( पहियों पर जिंदगी-12)
11 अक्तूबर 1993 -  हमारा दोपहर का पड़ाव सेक्टर 18 का गुरुद्वारा है। मैं इससे पहले साइकिल से चंडीगढ़ शहर को नापता हुआ सेक्टर 17 पहुंचा। सेक्टर 17 मतलब चंडीगढ़ का मुख्य बाजार। मुझे अब तक खींची गई तस्वीरों के फोटो प्रिंट बनवाने थे। कलर लैब में एक घंटे की सर्विस थी। हाथों फोटो लेकर मैं सेक्टर 18 के गुरूद्वारे पहुंच गया। यहां लंगर में भोजन के दौरान काफी मात्रा में खीर परोसी गई। हमलोग खाकर तृप्त हो गए। थोड़े आराम के बाद चाय मिली। इसके बाद यात्रा सदभावना का जोश भरती हुई चंडीगढ़ के अलग अलग सड़कों से होती हुई रॉक गार्डन पहुंची।



यहां चंडीगढ़ के पर्यटन अधिकारी डाक्टर कालिया ने हमें चंडीगढ़ शहर और रॉक गार्डन के बारे में रोचक जानकारियां दी। चंडीगढ़ पंजाब और हरियाणा की राजधानी है पर स्वंय एक केंद्रशासित शहर है। पंजाब और हरियाणा का विधानसभा भवन एक ही जगह पर स्थित है।

नेकचंद सैनी से मुलाकात - रॉक गार्डन शहर की अदभुत कलाकृति है जिसका निर्माण नेकचंद सैनी ने किया है। वे एक सड़क निरीक्षक थे। हर रोज शिवालिक पर्वत पर जाकर वहां से पत्थर इकट्टा कर लाते थे। पत्थरों और दूसरी बेकार की सामग्री को जुटाकर उन्होंने रॉक गार्डन जैसी अनुपम चीज बना डाली। ये प्रक्रिया 1958 में शुरू हुई। कुल 25 एकड़ में फैले इस रॉक गार्डन को हालांकि गैरकानूनी तरीके से बनाया गया पर बाद में यह कृति इतनी शानदार बन गई कि सरकार ने इसे सम्मान दिया। इसके निर्माता नेकचंद सैनी से हमारी मुलाकात और प्रत्यक्ष वार्ता हुई। उन्होंने हमारी ढेर सारी जिज्ञासाओं का निवारण भी किया। उन्हे अब दुनिया के कई और देशों से रॉक गार्डन जैसा ही बाग बनाने का आमंत्रण मिल रहा है।




सुकना लेक पर सुस्वादु भोज - हमारी आज की शाम सुकना झील के तट पर होती है। झील के किनारे ही सर्वधर्म प्रार्थना सभा हुई। रात्रि भोजन पंजाब सरकार के कृषि विभाग की ओर से है। झील के तट पर हरियाली के बीच डिनर। खाने का मीनू पांच सितारा जैसा है। केटरिंग का इंतजाम उम्दा है। नान, तंदूरी रोटी और सब्जी की कई किस्में, मानो किसी शादी की दावत उड़ा रहे हों। ऐसा भोजन यात्रा में आगे कहीं भी नहीं मिला। सभी यात्री खाकर मस्त हैं। चंडीगढ़ में तीन दिनों के पड़ाव में हमने तकरीबन शहर के हर सेक्टर को साइकिल से नाप डाला। इसके अलावा हमारे कार्यक्रम पड़ोस के शहर पंचकूला, मोहाली और पिंजौर में भी हुए।   

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