Tuesday, July 29, 2014

आओ चलें पिंजौर गार्डेन (( 13))


( पहियों पर जिंदगी 13) 
12 अक्तूबर 1993- चंडीगढ़ के अखबारों में सदभावना यात्रा की बडी बड़ी खबरें और तस्वीरें छप रही हैं। पंजाब केशरी, ट्रिब्यून जैसे अखबारों के अलावा खासकर एक्सप्रेस न्यूज लाइन में आधे पेज से ज्यादा की कवरेज है। हमारे कई साथियों की तस्वीरें अखबारों में छप गई हैं जिसे देखकर वे काफी खुश हैं। आज का कार्यक्रम पंचकूला शहर के ओर है। पंचकूला चंडीगढ़ से लगा हुआ हरियाणा का शहर है। सुबह रेलवे स्टेशन से साइकिल रैली सदभावना का अलख जगाती मनी माजरा होते हुए पंचकूला के सेक्टरों से गुजरती हुई पिंजौर की ओर चली। रास्ता थोड़ा पहाड़ी और चढाई वाला था। सो साइकिल चलाने वालों को पसीना आने लगा। लंबी साइकिल यात्रा के बाद थकान हो गई। पर पिंजौर पहुंचने पर सबको शीतल पेय और मिठाइयां मिलीं। थकान काफूर हो गया। 




पिंजौर में आम का बहुत बड़ा बाग है। यादवेंद्रा गार्डन महाराजा पटियाला द्वारा बनवाया गया बागीचा है। आधे घंटे रेलयात्री बाग में घूमते रहे। हर साल यहां आम के मौसम में विशाल मैंगो फेस्टिवल लगता है। पिंजौर गार्डन में ही कई किस्म के आम के पेड़ हैं। पिंजौर के बाद कालका शहर आता है। इसके बाद हिमाचल प्रदेश का इलाका आरंभ हो जाता है। इसके बाद का ठिकाना था पिंजौर हाई स्कूल का प्रांगण। यहां बच्चों के बीच दोपहर की सभा हुई।

पिंजौर गार्डन लगभग एक सौ एकड क्षेत्र पर बना हुआ है, चारों तरफ़ ऊंची दीवारें है। आकार में यह आयताकार है। हर दीवार की ओर एक दरवाज़ा है। हर कोने में एक सीढ़ियों वाला जीना बना हुआ है। मुग़ल गार्डन की तर्ज पर यह ढलान वाली भूमि पर बना हुआ है। गार्डन में कई महल जैसे शीश महल (कांच का महल), रंग महल (चित्र महल), जल महल (पानी का महल) बना है। 

पिंजौर से रेल यात्रियों के लिए शाम को चंडीगढ़ की और लौटना भी रोमांचकारी अनुभव रहा, क्योंकि साइकिल ढलान की ओर चलानी थी। पंचकूला शहर के एक गुरुद्वारे में रात का भोजन था। यहां पंजाब सरकार के परिवहन मंत्री और संगरूर के एमएलए जसबीर सिंह भी आए थे। यहां से रेल यात्रा में कुछ नए यात्री शामिल हुए। इनमें जसबीर सिंह एमएलए की बेटी अमनजोत कौर, पुनीत, गगनदीप, सुस्मिता शर्मा ( सहारनपुर)  और सतिंदर कौर आदि प्रमुख थीं। इनमें कुछ चंडीगढ आर्ट कालेज में बैचलर आफ फाइन आर्टस की छात्राएं हैं। रात को हमारी ट्रेन सबके सोने के बाद नई मंजिल के लिए प्रस्थान कर गई। कहां...अरे आगे भी तो पढिए। 


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