Saturday, August 9, 2014

चौथे गुरु गुरु रामदास ने बनवाया स्वर्ण मंदिर ((24))


(पहियों पर जिंदगी 24)
अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के बारे में कहा जाता है कि देश में जितने धार्मिक स्थल हैं उनमें ज्यादातर में सीढ़ियां चढ़ना पड़ता है पर दरबार साहिब अमृतसर में हमें सीढ़िया उतरना पड़ता है। हमने दरबार साहिब की परिक्रमा की। इसके बाद लंगर छकने मंदिर के विशाल लंगर हाल की तरफ गए। गुरुद्वारे के लंगर हाल काफी बड़ा है। 24 घंटे चलने वाले अखंड लंगर में बरतनों को ढोने के लिए गाड़ियां लगी हैं। रोटी ( पंजाबी में चातां) बनाने के लिए मशीने लगी हैं। यहां सबको थोड़ी देर आराम करने का मौका मिला।

 स्वर्ण मंदिर परिसर में अकाल तख्त का भी दफ्तर है जो सिखों के पांच तख्तों में सबसे बड़ा है। इसके अलावा चार तख्त हैं केशगढ साहिब आनंदपुर साहिब (पंजाब), दमदमा साहिब, तलवंडी साबो (भटिंडा), श्री हरिमंदिर साहिब यानी पटना साहिब (बिहार), और श्री हुजुर साहिब, नांदेड़ ( महाराष्ट्र) ।



इसके बाद दरबार साहिब में भी एक छोटी सी सभा हुई। इसमें दरबार साहिब के प्रमुख सेवादार सरदार नरेंद्र सिंह ने हमें सिख धर्म और उनके गुरूओं की कुरबानी के इतिहास के बारे में बताया। सिक्खों के चौथे गुरू रामदास ने 1573 में स्वर्ण मंदिर की नींव रखी थी। इसे हरिमंदिर साहिब या दरबार साहिब कहते हैं।
हमने सभा में बातचीत के दौरान सन 1984 में आपरेशन ब्लू स्टार से पहले मंदिर में हथियारों के बड़े पैमाने के जमावड़े का सवाल उठाया तो उन्होंने इसे पूरी तरह से राजनैतिक कहकर टाल दिया। हमें अमनजोत और गुरप्रीत ने स्वर्ण मंदिर के बारे में और भी रोचक जानकारियां दीं। खास मौकों पर स्वर्ण मंदिर को बिजली की रोशनी से रोशन किया जाता है तब इसकी खूबसूरती और बढ़ जाती है।



स्वर्ण मंदिर के बाहर कुछ अच्छी अच्छी दुकानें हैं। सभी रेल यात्री अपने लिए यहां से यादगारी के लिए कुछ न कुछ खरीद रहे हैं। गुरू गोबिंद सिंह जी की फोटो, स्वर्ण मंदिर की तस्वीर, मूर्तियां, तलवार, चाकू आदि। स्वर्ण मंदिर पवित्र गुरु द्वारा सरोवर के बीच स्थित है। यह सोने के पत्तरों से मढा हुआ है।

स्वर्ण मंदिर का प्रसाद है शुद्ध घी का बना हुआ हलवा। सहरानपुर की बहन सुस्मिता शर्मा ने हलवा खरीदा और हम सबको खिलाया। गुरप्रीत को अक्ल वाले दांत निकल रहे हैं इसलिए वह दांत के दर्द से काफी परेशान है। इसलिए वह चाहकर भी हलवा नहीं खा पा रही है।




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