Thursday, August 7, 2014

अमृतसर का गुरुद्वारा शहीदां ((22))

अमृतसर में हमारा रात्रि भोजन चटाविंड गेट इलाके में जनरैल सिंह के घर था। उनके घर पास हमने गुरूद्वारा शहीदां देखा। इस गुरूद्वारे के बारे में हरविंदर ने बताया कि ये बहादुर सिख शहीद बाबा दीप सिंह की याद में बना है। वे अपने सिर कट जाने के बाद भी मुगलों के खिलाफ देर तक लड़ते रहे। सिख रिवायतों में उनके लिए कहा गया है- सूरा सो पहचानिए जो लड़े दीन के हेत...पुरजा पुरजा कट मरे तबहूं ना छाड़े खेत। 

अमर शहीद बाबा दीप सिंह 26 जनवरी 1682 को अमृतसर से 40 किलोमीटर दूर स्थित गांव पहुविंड में पिता भाई भगता जी और मां ज्यूनी जी के घर पैदा हुए थे। बाबा दीप सिंह जी अपने मां-बाप की इकलौती संतान थे। वे 12 साल की उम्र में आनंदपुर साहिब में दशमपिता श्री गुरु गोबिंद सिंह जी से मिलने गए। गुरुजी ने उन्हें इस नन्ही आयु में ही सिखी के प्रचार के लिए आदेश दिया था।  18 साल की आयु में बाबा जी ने श्री आनंदपुर साहिब में गुरु गोबिंद सिंह की मौजूदगी में पांच प्यारों से अमृतपान किया। बाबा जी जहां धार्मिक प्रवृति के इंसान थेवहीं एक महान शूरवीर योद्धा भी थे। बाबा ने 1705 से लेकर 1728 तक भाई मनी सिंह के साथ मिल कर कई हस्तलिखित गुरुग्रंथ साहिब लोगों में बांटे और उन्हें सिख धर्म से जोड़ा। 



दमदमी टकसाल के पहले मुखी बाबा दीप सिंह जी ने बंदा सिंह बहादुर के साथ मिल कर मुगलों के साथ कई लड़ाइयां लड़ी। सन 1762 में  श्री हरमंदिर साहिब की पवित्रता को बरकरार रखने के लिए करीब बीस हजार मुगलों के साथ लड़ाई लड़ी। अहमद शाह अब्दाली के आदेश पर जहान खान के अगुवाई में सेना दरबार साहिब को अपवित्र करने के इरादे से आई थी। बाबा जी 15 किलो के खंडे के साथ धर्म युद्ध लड़ते हुए शहीद हुए। 

शहादत से पहले उन्होंने आने वाली कई पीढ़ियों के लिए मिसाल कायम करते हुए अपना शीश काट कर तली पर रखा और फिर सैकड़ों मुगलों को मौत के घाट उतार डाला। उसके बाद श्री हरमंदिर साहिब में अपना शीश भेंट कर दिया।
 
चारों तरफ से दीवारों से घिरे शहर अमृतसर में तरनतारन रोड पर चाटीविंड गेट के पास बाबा दीप सिंह की याद में बना वर्तमान गुरुद्वारा 1920 का है जिसका प्रबंधन एसजीपीसी के अधीन है। इस गुरुद्वारे को अंतिम संस्कार साहिब नाम से भी पुकारा जाता है। यह गुरुद्वारा घनी आबादी के बीच स्थित है। पर शहादत की कहानी सुनाता ये गुरुघर सिर्फ सिख इतिहास नहीं बल्कि हर भारतीय के लिए प्रेरक है।



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