Tuesday, August 5, 2014

जालंधर के निक्कू पार्क की एक शाम ((20))

रायपुर रसुलपूर से लौटते समय गांव के छात्रों के साथ। 
( पहियों पर जिंदगी 20)
17 अक्तूबर 1993-  हमारी सुबह रायपुर रसुलपुर गांव में हुई। स्नान ध्यान के बाद गुरुद्वारे में फिर शानदार नास्ता मिला। नास्ते में पूड़ी, तीन तरह की सब्जियां, मक्की की रोटी, साग और फल। अरे भाई कितना खाओगे... नास्ते के बाद एक बार फिर बाबा जी से सिक्के प्राप्त हुए। गुरूद्वारे में सद्भावना यात्रा की सफलता के लिए अरदास की गई। इसके बाद हम रवाना हो गए शहर की ओर। यहां होशियारपुर की बहन राजिंदर कौर हमारे साथ हैं। उनके साथ पूरी सांस्कृतिक टोली है। उनमें एक है मनजिंदर। उसकी हंसी कभी न भूलने वाली है। वह हंसती है तो मानो सैकड़ो फूल झड़ते हैं।
शहर पहुंच कर हमलोग एक पुरानी एनवाईपी की कैंपर अमरप्रीत के घर गए आनंद पंडित भाई साहब के साथ। उनके घर नास्ते में पंजाब का पारंपरिक मक्की की रोटी और सरसों का साग खाने को मिला। उस साग का स्वाद नहीं भूलता। अमरप्रीत के घर से निकलकर मैं ट्रेन पर आ गया।




शाम की प्रार्थना सभा शहर के माडल टाउन में निक्कू पार्क में हुई। नीकू पार्क जालंधर शहर की धड़कन है। शहर का सौंदर्य यहां दिखाई देता है। रात्रि भोजन माडल टाउन के आर्य समाज मंदिर में है। शाम की सभा में राजिंदर कौर और उनकी सहेलियों ने गिद्दा पेश किया। सर्वधर्म प्रार्थना के बाद सुब्बाराव जी कहते हैं- पिछले कई सालों में पंजाब का माहौल बदला है। अब आतंकवाद का साया कम हो रहा है। दुकानें देर रात तक खुलती हैं। 

पार्कों में मस्ती लौट आई है। अमन का माहौल बना है।  उन्होंने चंबल में डाकूओं के आत्मसमर्पण के बाद बदले माहौल को याद किया। भाई जी ने प्रोफेसर चार्ल्स रूच की पुस्तक पर चर्चा करते हुए कहा उन्होने अमेरिका के बारे में लिखा है  we are most backward country in the world investing more and more money for arms.
भाई जी आगे कहते हैं कि भारत का नक्शा गलत बना हुआ है। हिंदुस्तान के नौजवानों को इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। उन्हें पाकिस्तान और बांग्लादेश के निर्माण पर दुख है। सुब्बराव जी व्यक्तिगत बातचीत के क्रम में कहते हैं कि वे पाकिस्तान में भी सद्भावना शिविर लगाने को इच्छुक हैं।


vidyutp@gmail.com

(JALANDHAR, NIKKU PARK, PUNJAB, RAIPUR RASULPUR ) 


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