Saturday, August 2, 2014

लुधियाना में हमें उपहार में मिला स्वेटर ((17))

( पहियों पर जिंदगी 17) 
15 अक्तूबर 1993 – सुबह हमारी सदभावना साइकिल रैली लुधियाना के विभिन्न बाजारों से होती हुई मल्टी परपस विद्यालय पहुंची। दोपहर का कार्यक्रम यहीं हुआ। विद्यालय के बच्चों के बीच रेल यात्रियों का परिचय हुआ। यहां पर जर्मनी से आई सेंड्रा और मारेन को स्थानीय स्कूली बच्चों ने सवाल पूछ पूछ कर काफी परेशान किया।


यहां सभी रेल यात्रियों के भोजन व्यवस्था के लिए एक नया प्रयोग किया गया। स्कूल के चयनित छात्रों के घर दो दो रेलयात्रियों को भेजा गया। स्कूल के प्रबंधन और हमारे रेल यात्रा के सचिव रणसिंह परमार जी ने मिलकर रेलयात्रियों अलग अलग मेजबानों के घर में भेज दिया। हम स्कूल के दो छात्र विकास और उसके भाई से बातों में व्यस्त थे। पूरी सभा खाली हो चुकी थी। हमने चिंता की हमारा एलाटमेंट तो हुआ नहीं हम कहां दोपहर के भोजन के लिए जाएंगे। विकास बोल पड़ा- आप हमारे मेहमान हैं। हम आपको अपने घर ले जाने के लिए ही तो बैठे हैं। विकास तब सनातन धर्म प्रचारक विद्यालय में 12वीं कक्षा में पढ़ते थे। हम उनके साथ साइकिल चलाते हुए उनके पुराना माधोपुरी स्थित घर पहुंचे। स्वेटर निर्माण की विशाल मंडी के बीच विकास का घर। विकास के घर के लोग भी स्वेटर बनाने की छोटी इंडस्ट्री चलाते थे। घर में मम्मी, पापा, दादा दादी के अलावा भाई भूपेंद्र बहन मोनिका और मीनाक्षी है। वे मेरा और भाई का परिचय पाकर अत्यंत खुश हैं। खाने की थाली में इतने व्यंजन परोसे गए कि उसका आधा भी खाना मेरे लिए मुश्किल था। 

विकास की मां बताती हैं यहां बड़े पैमाने पर ऊनी वस्त्रों का काम होता है। इसलिए बिहार, यूपी बंगाल से आने वाले लोगों को आसानी से रोजगार मिल जाता है। पूरी, खीर और कई तरह के व्यंजन खाकर हम तृप्त हो गए। चलने लगे तो विकास मां ने एक सफेद रंग का खूबसूरत हाफ स्वेटर मुझे उपहार में सौंपा। संकोच करते हुए मैंने इसे ग्रहण कर लिया। रात को नौ बजे ट्रेन खुलने से पहले विकास रेलवे स्टेशन पर दौड़ते हुए पहुंचे। उन्होंने एक किलो का मिठाई का डिब्बा भेंट करते हुए कहा कि खाने पीने में कोई भूल चूक रह गई हो तो.... और हम भावनाओं की सागर में बह गए। इतना प्यार पंजाब में। सोचा न था।

कई साल बाद 2004 में दैनिक जागरण के लुधियाना संस्करण की लांचिंग के बाद मेरी पोस्टिंग लुधियाना में हो गई। दो साल के लुधियाना प्रवास के दौरान विकास से फिर मिलना हुआ। अब विकास मोटे ताजे उद्योगपति बन चुके थे। उनका अपना स्वेटर का ब्रांड है विकास गुरू।


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