Sunday, May 4, 2014

ग्वालियर से तीन पैसेंजर ट्रेनें चलती हैं रोज

ग्वालियर के चमचमाते रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 4 से श्योपुर के लिए स्पेशल गेज की पैसेंजर चलती है। इसके प्लेटफार्म एक तरह से देखा जाए तो ग्वालियर रेलवे स्टेशन के बीचों बीच हैं क्योंकि बड़ी लाइन के प्लेटफार्म नंबर एक दो और तीन के बाच 4 छोटी लाइन का प्लेटफार्म है इसके बाद बड़ी लाइन का यार्ड बना हुआ है। फिलहाल ग्वालियर से दिन भर में तीन ट्रेनें इस मार्ग से चलती हैं एक सुबह साढ़े बजे श्योपुर कलां के लिए दूसरी नौ बजे सबलगढ़ के लिए फास्ट पैसेंजर ट्रेन। फिर दोपहर के बाद साढ़े तीन बजे सबलगढ़ के लिए पैसेंजर ट्रेन। आमतौर पर सभी ट्रेनें अपने समय से खुलती हैं। इनके लिए टिकट घर भी प्लेटफार्म नंबर 4 पर ही बना हुआ है। ग्वालियर में ही इस छोटी लाइन का मेनटेंस यार्ड भी है।

फिलहाल ट्रेन में 1992 के बने हुए डिब्बे इस्तेमाल में लाए जा रहे हैं। एक ट्रेन में अमूमन सात या आठ डिब्बे होते हैं। सारे ही डिब्बे सेकेंड क्लास के हैं। ट्रेन के डिब्बों में बैठने की सीटें लकड़ी की हैं इसमें अभी गद्दे नहीं लगाए गए हैं। हालांकि इन डिब्बों में अब यात्रियों के गरमी में राहत प्रदान करने के लिए पंखे लगाए जा चुके हैं। इस मार्ग पर किसी तरह के आरक्षण की व्यवस्था लागू नहीं की गई है।

नैरोगेज में रेल डाक सेवा भी - मजे की बात इस छोटी ट्रेन में रेलवे की डाक सेवा यानी आरएमएस सेवा भी चलती है। इसके लिए ट्रेन के एक कोच आधे हिस्से में आरएमएस का डिब्बा बना हुआ है। पर ट्रेन की लोकप्रियता का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि कई कारपोरेट कंपनियां इसके डिब्बों पर अपने उत्पादों का विज्ञापन देने को तैयार रहती हैं। ट्रेन के कुछ डिब्बे पूरी तरह टाटा साल्ट के विज्ञापन से रंगे हुए हैं।


हालांकि सिग्नल व्यवस्था के लिए इसमें अभी भी मैनुअल सिस्टम इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें हाथ से लोहे की बडे से हैंडल को पकड़ कर पटरियां बदलनी पड़ती हैं। ट्रेन के मार्ग में आने वाले ज्यादातर समपार फाटक भी दरवाजे की तरह बंद किए जाने वाले हैं। हालांकि कम गति की ट्रेन होने के कारण हादसे की बात कम सुनी जाती है। ग्वालियर से चलने के बाद इस रेल के मार्ग में आने वाले पहले दो स्टेशन अब ग्वालियर नगर की सीमा में ही आ गए हैं। घोसीपुरा और मोतीझील स्टेशन के बाद ट्रेन शहर के बाहर निकल जाती है।

इसके बाद ट्रेन का कुछ किलोमीटर लंबा मार्ग ग्वालियर मुरैना-धौलपुर हाईवे के साथ साथ भी चलता है। इस लाइन का मिलावली रेलवे स्टेशन हाईवे से बिल्कुल लगा हुआ है। उसके बाद ट्रेन हाईवे का साथ छोड़ देती है। हालांकि हाईवे पर पड़ने वाला औद्योगिक कस्बा बानमौर में बानमौर गांव भी इस ट्रेन का स्टेशन है। ट्रेन मुरैना जिले से गुजरती है पर जिला मुख्यालय मुरैना होकर नहीं जाती। मुरैना जिले की दो प्रमुख तहसीलें जौरा और सबलगढ़ इस ट्रेन के मार्ग से जुड़े हुए हैं। 
-    vidyutp@gmail.com  ( GLR - 3) 

( GWALIOR , SHEOPUR , LIGHT, RAILWAY, NARROW, GAUGE  )  

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