Monday, May 12, 2014

हरियाली के बीच हौले-हौले सफर – चल छैंया-छैयां

नीलगिरी माउंटेन रेल में मेट्टुपालियम से ऊटी के बीच कुल दस रेलवे स्टेशन आते हैं। छोटे छोटे सुंदर स्टेशन। मेट्टुपालियम के बाद खिलौना ट्रेन के सफर में कलार ( 08 किलोमीटर पर ), एडरली (13 किमी ), हीलग्रूव (18 किमी ),कन्नूर ( 28), वेलिंगटन (29 किमी), अखाकुंडु ( 32 किमी), कैटी (38 किमी), लवडेल ( 42 किमी) स्टेशन आते हैं। और आखिरी स्टेशन तो उदगमंदलम तो है ही। कलार और एडरली पैसेंजर स्टेशन के तौर पर बंद किए जा चुके हैं।

आजकल मेट्टुपालियम से ऊटी के बीच सुबह 7.10 बजे सिर्फ एक ट्रेन चलती है उसका नंबर है 56136 पैसेंजर। इसके टिकट पुराने तरीके के गत्ते वाले छोटे आकार के होते हैं। किराया है महज आठ रुपये। सीटिंग क्लास में 23 रुपये और प्रथम श्रेणी में 155 रुपये। यानी बस, टैक्सी से बहुत कम और सफर अत्यंत रोमांचक। कुछ ट्रेने सिर्फ कन्नूर से ऊटी के बीच चलती हैं। सुबह 7.45  बजे और दोपहर 1.35 बजे कन्नूर और उटी के बीच ट्रेन सेवा चलती है। अगर आप टॉय से ट्रेन से ऊटी नहीं जा सके तो ऊटी में रहते हुए छोटी दूरी में इसके सफर का पूरा मजा ले सकते हैं।

मेट्टुपालियम से एनएमआर की खिलौना ट्रेन हिचकोले खाते हुए हरे भरे जंगलों के बीच आपको सैर कराते हुए ऊटी पहुंचाती है तब आप 2200 मीटर से ज्यादा की ऊंचाई पर पहुंच चुके होते हैं। मौसम बदल चुका होता है। आपको एहसास होगा कि आप एक दूसरी दुनिया में पहुंच चुके हैं जहां शीतलता और हरियाली है। इसके साथ ही आप नीलगिरी के हसीन वादियों के सफर को हमेशा के लिए अपने यादों में संजो चुके होंगे।

एनएमआर को विश्व धरोहर का दर्जा
दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे की तरह नीलगिरी माउंटेन रेल को भी विश्व धरोहर का दर्जा यूनेस्को की ओर से मिल चुका है। जुलाई 2005 में देश के दूसरे रेल मार्ग को विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया गया। अनूठे रैक पिनियन सिस्टम, सौ साल से ज्यादा के सफर और हर मौसम में सफर जारी रहना इस रेल मार्ग को खास बनाते हैं।
ऊटी में 1250 मिलीमीटर औसत बारिश होती है जबकि कन्नूर में 1400 मिमी तक बारिश होती है। पर मौसम के उतार चढ़ाव के बीच इस रेल का सफर जारी रहता है। भारतीय रेलवे का ये संरक्षित मार्ग है जिसपर रेलवे खास तौर पर ध्यान रखता है। विश्व धरोहर के इस रेल मार्ग पर अभी पुराने क्लासिक टिकटों की ही बिक्री की जाती है। आज के दौर कंप्यूटरीकृत टिकट को इस रेल मार्ग पर नहीं लागू किया गया है।


इस मार्ग पर एक्स क्लास स्टीम रैक लोकोमोटिव का इस्तेमाल किया जाता था जो स्वीटजरलैंड की स्विस लोकोमोटिव वर्क्स की बनी हुई थीं। बाद में दक्षिण रेलवे ने कोयला चलित इन इंजन की जगह बायो डीजल से चलने वाले लोको को इस्तेमाल में लाना आरंभ किया। नान रैक सेक्शन कन्नूर से ऊटी के बीच ट्रेन संचालन के लिए वाईडीएम4 लोको का इस्तेमाल किया जाता है। 
- vidyutp@gmail.com

( NILGIRI MOUNTAIN RAILWAY, MITER GAUGE, OOTY, METTUPALAYAM, 

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