Friday, August 10, 2012

दार्जिलिंग- ऐसे हुई खिलौना ट्रेन की शुरूआत ((03))

दार्जिलिंग के घूम जॉय राइड पर । 
भारत की गर्मी नहीं बर्दाश्त कर पाने वाले अंग्रेजों ने देश में कई हिल स्टेशन की तलाश की और उन्हें विकसित किया। उनमें दार्जिलिंग भी एक था। पर सिलिगुड़ी से दार्जिलिंग जाने के लिए घोड़ागाड़ी से जाना ही तब विकल्प था। इसलिए इस सड़क का नाम दिया गया था हिल कार्ट रोड। अंग्रेजों ने दार्जिलिंग में स्वास्थ्य लाभ के लिए एक सेनिटोरियम और एक सैन्य डिपो का निर्माण कराया था।

दार्जिंलिग से लगातार बढ़ते चाय के व्यापार के कारण यहां घोड़ा गाड़ी के अलावा परिवहन के दूसरे विकल्प की जरूरत महसूस की गई। इस्टर्न बंगाल रेलवे के फ्रैंकलिन प्रेस्टिज ने सिलिगुड़ी से दार्जिलिंग के बीच स्टीम ट्रामवे चलाने का प्रस्ताव रखा। बंगाल के तत्कालीन गवर्नर सर एस्ली इडेन ने रेलवे नेटवर्क के लिए समिति का निर्माण कराया। 1879 में दार्जिलिंग तक रेल लिंक के लिए प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया और इसी साल रेलवे लाइन का निर्माण शुरू हो गया। इससे पहले 1878 में सिलिगुड़ी कोलकाता से ब्राडगेज नेटवर्क से जुड़ गया था। ग्लिंडर्स आरबुथनॉट एंड कंपनी को निर्माण का ठेका मिला। 

मार्च 1880 तक सिलिगुड़ी  से तीनधारा तक का मार्ग तैयार हो गया। जब वायसराय लार्ड लिटन दार्जिलिंग के दौरे पर आए तो वे टाय ट्रेन में बैठकर तीनधारा तक गए। सिलिगुड़ी से दार्जिलिंग के बीच मार्ग का उदघाटन 4 जुलाई 1881 को हुआ। तब इस कंपनी का नाम दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे कंपनी रखा गया। 
पहले रेल लाइन का मार्ग भी हिल कार्टरोड के समांतर रखा गया था। पर बाद में पता चला कि कुछ इलाके में दूसरे मार्ग से लोकोमोटिव का सफर आसान हो सकेगा। तब 1882 में सुकना और गयाबाड़ी के बीच चार लूप मार्ग और चार रिवर्स मार्ग का निर्माण किया गया।

दार्जिलिंग रेलवे स्टेशन के भवन का पुनर्निर्माण 1891 में हुआ जो अभी वर्तमान स्थित में दिखाई देता हैजबकि कर्सियांग रेलवे स्टेशन के भवन को 1896 में नया रंग रूप दिया गया। 1919 में बतासिया लूप का निर्माण हुआ जहां से दार्जिलिंग शहर का सुंदर नजारा दिखाई देता है।
1962 में डीएचआर रेल मार्ग का विस्तार सिलिगुड़ी से न्यूजलपाईगुडी तक किया गया। एनजेपी इस मार्ग का मुख्य और बड़ा स्टेशन है। छह किलोमीटर के विस्तार से खिलौना ट्रेन एनजेपी जैसे बड़े स्टेशन से जुड़ गई। लोको शेड और कैरिज डिपो को सिलिगुड़ी से न्यू जलपाईगुड़ी में शिफ्ट किया गया।
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 ( डीएचआर 3)  पहली कड़ी यहां पढ़ें 
 ( DHR, DARJEELING HIMALAYAN RAILWAY )

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