Tuesday, July 15, 2014

हजार बागों वाला शहर यानी हजारीबाग

हजारीबाग यानी हजार बागों वाला शहर। जैसा की नाम सेलगता है ये शहर कभी हजार बागों के लिए जाना जाता है। पर अब यहां हजारबाग तो नहीं पर ये झारखंड का प्रमुख शहर है जहां की आबोहवा अच्छी मानी जाती है। रांची, रामगढ़, हजारीबाग और बरही नेशनल हाईवे नंबर 33 पर आते हैं। अगर मानचित्र में देखें तो शहर पटना और रांची के बीचों बीच स्थित है। हालांकि शहर अभी रेल नेटवर्क से नहीं जुडा है। यहां कोडरमा से रेल नेटवर्क से जोड़ने का काम चल रहा है। यह रेल लाइन कोडरमा से हजारीबाग रामगढ़ होते हुए रांची चली जाएगी।

शहर में दो बस पड़ाव है। एक लंबी दूरी की बसों का और एक स्थानीय बसों का।हालांकि दोनों की दूरी आधे किलोमीटर की है। रेलनेटवर्क पर नहीं होने के कारण यहां आने के लिए कोडरमा या रामगढ़ से ट्रेन छोड़कर बस लेनी पड़ती है। बस स्टैंड के पास बिरसा चौक है जहां बिरसा भगवान की प्रतिमा लगी है। शहर का दूसरा प्रमुख चौराहा झंडा चौक है। यह शहर का मुख्य बाजार का इलाका है। मालवीय मार्ग पर अब कई छोटेछोटे मॉल बनने लगे हैं। शहर की दुकानों को देखकर लगता है कि फैशन में शहर महानगरों से मुकाबला करने के लिए तैयार हो रहा है।

शहर से बाहर बरही हाईवे पर नया निर्मल महतो पार्क बना है, जहां शहर के लोग शाम को तफरीह करने के लिए जाते हैं। इस पार्क का लगातार सौंदर्यीकरण किया जाता है। यहां बच्चों के लिए झूले लगे हैं। नववर्ष और छुट्टियों के दिन इस पार्क में काफी भीड़ उमड़ती है। शहर में समय बीताने योग्य स्थलों में एक झील भी है जहां बोटिंग का आनंद लिया जा सकता है। शहर से कुछ दूरी पर हजारीबाग नेशनल पार्क भी है। नेशनल पार्क में बाघ, भालू, लक्कड़बग्धा समेत कई वन्य जीव पाए जाते हैं। 25 वर्ग किलोमीटर में फैला ये पार्क मूल रूप से सांभर और चीतल के लिए जाना जाता है।

हजारीबाग शहर शिक्षा के केंद्र के तौर पर 1899 में स्थापित सेंट कोलंबस कालेज के लिए जाना जाता है, जो मानगो में स्थित है। साल 1992 में यहां संत बिनोबा भावे विश्वविद्यालय  की भी स्थापना की गई है। इसका परिसर नेशनल हाईवे 33 पर स्थित है। अपने छोटे से हजारीबाग प्रवास में मेरी उस सेंट्रल जेल को भी देखने को इच्छा थी जिससे जय प्रकाश नारायण समेत सात क्रांतिकारी आजादी के आंदोलन के दौरान भागे थे। हजारीबाग सेंट्रल जेल अति सुरक्षित मानी जाती है। पर मेरी ये तमन्ना पूरी नहीं हो सकी।
हजारीबाग बस अड्डे में खड़ी बिहार की सरकारी बस जो अब कम नजर आती है।

मैंने पटना के लिए 1 बाई2 लक्जरी बस में ( राजश्री बस सर्विस) एक टिकट बुक कराया। ( किराया 200 सीट, स्लीपर 220 )। बस का स्लीपर ट्रेन के स्लीपर से भी चौड़ा और आरामदेह था। बस खुलने में काफी समय था सो सोचा बाल कटवा लिए जाएं। एक वातानूकुलित सैलून में पहुंचा। वहां हेयर कटिंग की दर थी बिना एसी के 30 रुपये एसी चलने पर 40 रुपये। एसी चल नहीं रहा था। खैर मैंने बाल कटवा लिए।
रात को ठीक 10.10 बजे पटना के लिए राजश्री बस खुल गई।  हजारीबाग शहर के बाहर आने पर बस रूकी सभी यात्रियों की वीडियोग्राफी हुई। यह सुरक्षा कारणों से हुआ।  शायद ऐसा रोज होता हो। थोड़ी देर बाद बस बरही में थी। उसके बाद मुझे नींद आ गई। सुबह 4.15 बजे आटो रिक्शावालों की चिल्लपों से आंख खुली तो पता चला कि हमारी बस पटना के मीठापुर बस अड्डे में आकर खड़ी थी।

- विद्युत प्रकाश मौर्य   
(HAJARIBAG, JHARKHAND, CITY,  BUS SERVICE ) 

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