Wednesday, May 28, 2014

विश्व धरोहर कालका शिमला रेल ((02))

केएसआर के सौ साल पर जारी डाक टिकट। 
संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनेस्को ने कालका शिमला रेल नेटवर्क को विश्व धरोहर का दर्जा दे रखा है। जुलाई 2008 में इस रेल मार्ग को यूनेस्को से वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा पाने का सौभाग्य मिला। कनाडा के क्यूबेक सिटी में इसे विश्व धरोहर की सूची में शामिल करने पर फैसला लिया गया।
इतना ही नहीं इसे विश्व के सबसे भरोसेमंद रेल सेवाओं में शामिल किया गया।

इससे पहले 2003 में सफल संचालन के 100 साल पूरे करने पर भारत सरकार ने कालका शिमला रेलवे पर एक पांच रुपये का डाक टिकट भी जारी किया था। अपने अनूठे नेटवर्क के लि पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे और तमिलनाडु के नीलगिरी माउंटेन रेलवे को इससे पहले ही ये दर्जा मिल चुका था। तो बात करते हैं इसकी कुछ अनूठी विशेषताओं की।

केएसआर का एक रेलवे स्टेशन भवन। 
रोमन शैली के पुल - कालका शिमला रेलवे लाइन के सभी पुल रोमन शैली में बनाए गए हैं। इन पुलों का डिजाइन इस तरह बनाया गया कि ये हवा और पानी का दबाव झेल सकें।

रास्ते में आने वाली गहरी घाटियों की कम चौड़ाई पर कार्य करने की समस्या से निपटने के लिए उन घाटियों की ऊंचाई को काटकर तथा समतल बनाकर बड़ी बुद्धिमानी से कई पुलों का निर्माण किया गया। गिनीज बुक ऑफ रेल फैक्ट्स एंड फीटने इसे द ग्रेटेस्ट नैरो गेज इंजीनियरिंग ऑफ इंडियाबताया है। 

कालका शिमला रेल में विश्व का सबसे ऊंचा मल्टी आर्क गैलरी ब्रिज बना है तो अपने समय की सबसे लंबी सुंरग बनी थी। पहाड़ों पर इस तरह की रेल का उदाहरण दुनिया के किसी और देश में नहीं है। पहाड़ों के पर्यावरण को बिना किसी तरह का नुकसान पहुंचाए ये ट्रेन सौ साल बाद भी यात्रियों को सेवा दे रही है। खासतौर पर हिमालय क्षेत्र के पहाड़ों की चट्टानें कोमल हैं। इस कारण यहां चट्टान दरकने, भूस्खल और मौसम के बदलाव से होने वाले खतरे ज्यादा हैं।


18 स्टेशन, 96 किलोमीटर का सफर - कालका शिमला के 96 किलोमीटर के सफर के बीच कुल 103 सुरंगे हैं। कुल 18 रेलवे स्टेशन हैं रास्ते में। कालका से चलने के बाद रास्ते में टकसाल, गुम्मन, कोटी, जाबली, सनावर, धर्मपुर, कुमार हट्टी डगशाई, बड़ोग, सोलन, सलोगड़ा, कंडाघाट, कनोह, कैथलीघाट, शोघी, तारादेवी, जतोग, समर हिल स्टेशन आते हैं।


टकसाल में अनूठा घुमावदार सफर - कालका शिमला रेल के निर्माण में तकनीक के कमाल का उदाहरण टकसाल रेलवे स्टेशन के पास देखने को मिलता है। यहां पर रेल एक ही स्थान पर चक्कर काटती हुई पहाड़ों पर ऊंचाई की ओर पहुंचती है। आप सफर के दौरान उन नीचे की पटरियों को देख सकते हैं जहां से चलते हुए आपकी ट्रेन ऊंचाई पर आई है। एक ही स्थान पर चक्कर काटते हुए ट्रेन कई सौ फीट की ऊंचाई प्राप्त कर लेती है। और यहीं पर आपको पहाड़ों के मौसम बदलने का एहसास होने लगता है जो आगे शिमला तक जारी रहता है।

केएसआर में चार तरह के कोच-
कालका शिमला रेल मार्ग पर यात्रियों के लिए चार तरह के कोच चलाए जाते हैं। इनमें डिलक्स, फर्स्ट क्लास और सेकेंड क्लास में दो तरह के कोच शामिल हैं। सेकेंड क्लास में लकड़ी की सीट वाले कोच हैं तो कुछ गद्दे वाली सीटें भी हैं। इस मार्ग पर वातानुकूलित कोच नहीं है। सदाबहार मौसम होने के कारण उसकी जरूरत भी महसूस नहीं की गई।
आज देश भर के ट्रेनों एलुमिनियम के इस्तेमाल वाले एलएचबी कोच लगाए जा रहे हैं पर कालका शिमला रेल मार्ग के कोच के वजन को कम करने के लिए एलुमिनियम का इस्तेमाल पहले से ही ज्यादा मात्रा में किया जा रहा है।
- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 

 (  KSR, KALKA SHIMLA RAIL, NARROW GAUGE ) 

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