Wednesday, July 2, 2014

कंक्रीट के जंगल में तब्दील होता रांची

जन शताब्दी ने सही समय पर रांची पहुंचा दिया। हमारे पुराने मित्र और वरिष्ठ पत्रकार अशोक कुमार जी स्टेशन पर मौजूद थे। उनका स्नेह है मेरे प्रति, वे मुझे सीधे अपने घर ले गए। टैगोर हिल से आगे बोड़िया रोड पर वृंदावन कालोनी। शहर के कोलाहल से दूर हरियाली के गोद में बसी कालोनी। आसपास में दो पहाड़ नजर आते हैं। इसी कालोनी में अशोक जी ने अपना घर बनाया है।  अशोक जी को खाने के बाद सैर करने की आदत है। कालोनी में सैर करते हुए लगता है कंक्रीट के जंगल में तब्दील होती राजधानी रांची से उनकी कालोनी अभी काफी अलग है। उनके बेटे सिद्धार्थ, बेटियां सुजाता, श्वेता और उनकी मां ने अथक प्रयास से ये आशियाना बनवाया है। 
हमारे दोस्त मुकेश बालयोगी बताते हैं कि रांची में पिछले पांच सालो में अपार्टमेंट संस्कृति तेजी से बढ़ी है। बहुमंजिले टावर बनने लगे हैं। शहर में भीड़ काफी बढ़ी है। कभी बिहार के सर्दियों की राजधानी बनने वाली रांची में महानगरों जैसा कोलाहल सुनाई देने लगा है। हालांकि मोराबादी मैदान के आसपास के इलाको में चौड़ी सड़के दिखाई देती हैं। यहीं मुझे झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता शीबू सोरेन का विशाल आवास दिखाई देता है। शहर के लालपुर चौक पर पैंटालून का मॉल बन गया है। सरकुलर रोड पर वाहनों की चिल्लपों बढ़ गई है।

शहर का मुख्य चौराहा अलबर्ट एक्का चौक के आसपास के नजारे में काफी बदलाव आ चुका है। अलबर्ट एक्का चौक को लोग फिरायालाल चौक के नाम से भी जानते हैं। फिरायालाल रांची शहर का काफी पुराना और प्रतिष्ठित डिपार्टमेंटल स्टोर है। यहां आप ब्रांडेड कपड़े खरीद सकते हैं। बाद में इस चौक का नाम लांस नायक अलबर्ट एक्का के नाम पर  अलबर्ट एक्का चौक कर दिया गया है। पर फिरायालाल चौक दशकों से लोगों की जुबां पर चढ़ा हुआ है।

रांची में रिम्स और ओपोलो जैसे अस्पताल खुल गए हैं। अब शहर में आईआईएम भी है। वैसे शहर कई दशक पहले से शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा है। बीआईटी मेसरा और सेंट जेवियर्स कालेज यहां के पुराने प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान हैं।

शहर के बीचों बीच बहने वाली हरमू नदी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। कुछ संगठन हरमू नदी को बचाने की मुहिम चला रहे हैं। पर नदी नाले का रूप ले चुकी है। इसी नदी के तट पर हरमू हाउसिंग कालोनी बन गई है। 
रांची शहर की मुख्य सड़क की बदलती रौनक 

इस कालोनी में टीम इंडिया के महान क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी का घर है। इसी कालोनी ईटीवी का दफ्तर भी है, जहां मेरे कई पुराने साथी कार्यरत हैं। उनसे लंबे समय बाद मिलना हुआ। अजय लाल मेरे साथ हैदराबाद में काम करते थे, वे अब रांची ब्यूरो में आ गए हैं। हरमू हाउसिंग कालोनी पहुंचकर मुझे डॉ. प्रभु नारायण विद्यार्थी की याद आई जिनसे 2002 में अमृतसर के इंडियन हिस्ट्री कांग्रेस में मुलाकात हुई थी। विद्यार्थी जी अब इस दुनिया में नहीं रहे। उन्होंने राहुल सांकृत्यायन पर काफी काम किया था।  
  
   - विद्युत प्रकाश मौर्य
( RANCHI, CITY, JHARKHAND ) 

No comments:

Post a Comment