Wednesday, April 9, 2014

कोलकाता का हाथ रिक्शा शहर की पहचान

ऐसा रिक्शा सिर्फ कोलकाता में ही चलता है जिसमें दो पहिए होते हैं और उसे लेकर एक इंसान दौड़ता है। यूं समझिए कि ये एक घोड़ा गाड़ी या बग्घी जैसा है जिसमें घोड़े की जगह एक इंसान जुतता है।

पूरी दुनिया में शायद इस तरह का रिक्शा कहीं और चलता हो। इस रिक्शे को सड़क पर दौड़ता देख अंग्रेजी राज की याद आती है, सामंतशाही युग की याद आती है। पर ये रिक्शा कोलकाता के मानचित्र से हटाया नहीं जा सका है। क्यों। शायद कोलकाता की तंग गलियों और भीड़ भरे रास्ते में चलने के लिए ये रिक्शा मुफीद है। आलोचना तो दुनिया में तीन पहिए वाले साइकिल रिक्शा की भी होती है जिसे इंसान खींचता है।

अब कुछ राज्य साइकिल रिक्शा को पूरी तरह हटाकर बैटरी रिक्शा लाने पर विचार कर रहे हैं। पर कोलकाता में दो इंसान को लेकर दौड़ने वाले इस रिक्शा को हटाने की कयावद कई बार हुई लेकिन इसे अंजाम नहीं दिया जा सका है। जब कहीं ऐसे रिक्शे की तस्वीर दिखाई देती है तो ये जेहन में तुरंत कौंध जाता है कि ये कोलकाता है।

याद किजिए फिल्म दो बीघा जमीन। इस फिल्म में नायक बलराज सहनी गांव से कोलकाता आते हैं तो ऐसे ही हाथ रिक्शा खींचने का काम करते हैं। कहते हैं बलराज सहनी ने शूटिंग से पहले रिक्शा खींचने का पूरा अभ्यास किया था।

ऋतुपर्णो घोष की फिल्म रेनकोट में भी ऐसा रिक्शा दिखाई देता है। आम तौर पर तीन पहिए वाले साइकिल रिक्शा में हवा भरने वाले टायर ट्यूब  लगे होते हैं पर इस हाथ रिक्शा में टमटम जैसे पहिए लगे होते हैं। लकड़ी के पहिए जिनपर टायर की रिसोलिंग लगी रहती है। इस रिक्शे को भीड़ भाड़ में लेकर दौड़ने कि लिए अभ्यास और एक खास किस्म की लयात्मकता की जरूरत होती है।

-    विद्युत प्रकाश मौर्य  
( KOLKATA, BENGAL, RICKSHAW) 

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