Wednesday, April 23, 2014

सासाराम का ऐतिहासिक गुरुद्वारा चाचा फग्गूमल

सासाराम शहर शेरशाह के मकबरे के लिए प्रसिद्ध है। पर इस शहर में सिख इतिहास से जुडी महत्वपूर्ण स्मृति है। शहर के जानी बाजार में है ऐतिहासिक गुरुद्वारा चाचा फग्गूमल, जहां सिखों के नौंवे गुरू तेगबहादुर जी 21 दिनों तक रहे और संगतों को अपने आशीर्वाद से निहाल किया।
पर सासाराम रेलवे स्टेशन पर इस ऐतिहासिक गुरुद्वार के बारे में जानकारी देती हुई कोई पट्टिका नहीं लगाई गई है। रेलवे स्टेशन से इस गुरुद्वारे की दूरी महज दो किलोमीटर है। हालांकि जाने का रास्ता संकरी गलियों से होकर है। श्रद्धालु शहर के धर्मशाला रोड से होकर गोला फिर नवरतन बाजार होते हुए जानी बाजार पहुंच सकते हैं। या फिर पोस्ट आफिस चौक से लश्करीगंज  होते हुए भी जानी बाजार पहुंचा जा सकता है।


यहां तक पहुंचने का सुगम साधन रिक्शा ही है क्योंकि बड़ी गाड़ियों के पहुंचने के लिए अच्छी सड़के नहीं हैं। साल 2016-17 में सिखों के दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी का 350वां प्रकाश पर्व मनाया जा रहा है। इसके लिए उनके जन्मस्थान पटना साहिब में भव्य तैयारियां की जा रही हैं। इस सिलसिले में थोड़ा सा ध्यान गुरुद्वारा चाचा फग्गूमल के आसपास के सौंदर्यीकरण पर भी दिया जाता तो बेहतर होता।

सासाराम में 21 दिनों तक रहे नवम गुरु तेगबहादुर


कहा जाता है नवम पातशाही गुरु तेगबहादुर के सुमिरन से नौ निधियों का घर में वास होता है। सासाराम के लोग धन्य रहे जिन्हें हिंद की चादर नवम पातशाही का कई दिनों तक आशीर्वचन सुनने को मिला। साल 1666 में गुरु तेगबाहदुर अपने लाव लश्कर के साथ पूरब की उदासी ( यात्रा) पर निकले। इस यात्रा के दौरान नाम जपो किरत करो वंड छको का संदेश देते हुए वे काशी से पटना की यात्रा पर थे।
इस दौरान वे सासाराम में 21 दिनों तक रुके। यहां पर वे नानकशाही संत चाचा फग्गूमल की कुटिया में रहे। उनके साथ माता नानकी, उनकी धर्मपत्नी माता गुजरी और पत्नी भ्राता बाबा कृपाल चंद भी थे।
नवम पातशाही ने इस ऐतिहासिक शहर को पवित्र करने के साथ ही यहीं पर रहकर कई रचनाएं भी की। उन्होंने यहां पर राग जैजैवंती महला, धूर की वाणी, रामु सुमरी रामु सुमरी इहे तेरे काजि है, मैया को सरनि तियागु प्रभू के सरनि लागू, जगत सुख मानु मिथिया झूठो सब साझु है.. की गुरुवाणी बक्शीश की थी। इसकी चर्चा गुरु ग्रंथ साहिबजी के 1352 पन्ने पर शोभायमान है।

इन ऐतिहासिक तथ्यों की पुष्टि पंथ प्रमाणित ग्रंथ सूरज प्रकाश और तवारीख गुरु खालसा में भी होती है। गुरुनानक देव विश्वविद्यालय अमृतसर और पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला में इस पर शोध भी हो चुका है।

नवम पातशाही की कई स्मृतियां हैं यहां
चाचा फग्गूमल नानकशाही संत थे जो पंजाब के फगवाड़ा शहर से पंथ प्रचार के लिए बिहार आए थे। उसके बाद वे यहीं के होकर रह गए। नवम गुरु तेगबहादुर जब सासाराम आए तो चाचा फग्गूमल ने उनका सत्कार किया। सासाराम के इस ऐतिहासिक गुरुद्वारे में नवम पातशाही से जुड़ी कई स्मृतियां हैं।

दर्शनी दरवाजा या छोटा दरवाजा
दर्शनी दरवाजा के नाम से विख्यात यह 45 इंच ऊंचा, 35 ईंच चौड़ा छोटा दरवाजा है जिससे होकर नवम पातशाही जी ने चाचा फग्गूमल की कुटिया में दर्शन दिया था। इस दरवाजे को मूल स्वरूप में आज भी देखा जा सकता है। नवम पातशाही द्वारा साध संगत को भेंट किया गया शस्त्र साहिब, चाचा फग्गूमल का खड़ाऊ और नाम सिमरनी माला के भी दर्शन इस गुरुद्वारे में किए जा सकते हैं। इस माला में 76 मनके हैं।

गुरुजी द्वारा लगाया गया 350 साल से ज्यादा पुराना बेर का पेड़ गुरुद्वारा परिसर में मौजूद है। यह पेड़ अब भी हरा भरा है। इसमें सालों भर फल लगते हैं। वहीं उस चौकी के दर्शन किए जा सकते हैं जिस पर गुरु जी अपने सासाराम प्रवास के दौरान हर रोज स्नान किया करते थे।


गुरुद्वारा चाचा फग्गूमल साल 2012 में नए दरबार साहिब का निर्माण किया गया है। इसका निर्माण में गुरुद्वारा बंग्ला साहिब के जत्थेदार संत बाबा हरिवंश सिंह की जी भूमिका है। अभी यहां लंगर हॉल और यात्री निवास का निर्माण कार्य कराने की कोशिशें जारी हैं। गुरुद्वारे में अरदास नियमित सत्संग श्री अकाल तख्त साहिब की मर्यादा में होता है।
और भी गुरुद्वारे हैं सासाराम में-  सासाराम का दूसरा प्रमुख गुरुद्वारा है गुरुद्वारा गुरु का बाग। कहा जाता है यहीं पर नवम पातशाही गुरु तेगबहादुर जी ने अपना घोड़ा बांधा था। गुरुद्वारा चाचा फग्गूमल के पास ही गुरुद्वारा टकसाल संगत, गुरुद्वारा छोटी संगत, गुरुद्वारा बड़ी संगत जैसे गुरुद्वारे हैं। सासाराम शहर में सिख समुदाय के लोगों अच्छी खासी संख्या है जो इन गुरुद्वारों के इंतजामात देखते हैं।
कैसे पहुंचे - सासाराम मुगलसराय गया रेलवे लाइन पर स्थित है। नई दिल्ली और कोलकाता से तमाम रेल गाड़ियां उपलब्ध है। यह शहर ऐतिहासिक जीटी रोड पर है। सड़क मार्ग से भी पहुंचा जा सकता है। निकटम एयरपोर्ट वाराणसी और गया में हैं।

कहां ठहरें - 1. होटल मौर्या रॉयल  ,रौजा रोड सासाराम  ( http://www.mauryaroyal.com/)
2. होटल रोहित इंटरनेशनल  , जीटी रोड सासाराम।
3 Shersah Vihar, Sasaram-821 152.  AC Room/Deluxe Room/Economy Room/Dormitory Beds
4 Gopal Deluxe Hotel GT ROAD Sasaram 821115
Phone +916184224366

-    विद्युत प्रकाश मौर्य  
  
( SASARAM, GURRUDWARA CHACHA FAGGUMAL, GURU TEG BHADUR, SIKH TEMPLE ) 


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