Monday, April 21, 2014

रबड़ी, कबाब और अनरसा का शहर सासाराम


खानपान के लिहाज से देखा जाए तो सासाराम रबड़ी और कबाब का शहर है। इन दोनों व्यंजनों का आनंद आप यहां स्ट्रीट फूड के तौर पर ले सकते हैं। इसमें आप अनरसा को भी शामिल कर सकते हैं।
सासाराम के जीटी रोड पर पोस्ट आफिस चौक से धर्मशाला रोड की ओर जाते हुए आपको स्ट्रीट फूड के तौर पर रबड़ी और कबाब की कई दुकानें मिलेंगी। सासाराम की सड़कों की रबड़ी और कबाब दशकों से लोकप्रिय है। ये सब कुछ खानापीना यहां पर काफी सस्ती दरों पर उपलब्ध है।
आज भी आप वहां 10 रुपये और 20 रुपये प्रति कप रबड़ी खा सकते हैं। इस रबड़ी को मिट्टी के करूए में खाया जाए तो उसके स्वाद का आनंद और बढ़ जाता है। शहर के जीटी रोड पर आनंदी सिनेमा के सामने कई रबडी वाले स्टाल लगाए दिखाई दे जाते हैं। तो आइए जानते हैं ये रबड़ी बनती कैसे है।
रबड़ी एक प्रकार का पकवान है जो दूध को खूब उबाल कर व उसे गाढ़ा करके बनाया जाता है। बिना जल छोड़े दूध को जितना ही अधिक औंटाया जाये वह उतना ही अधिक गुणकारी, स्निग्ध (तरावट देने वाला), बल एवं वीर्य को बढ़ाने वाला  माना जाता है। रबड़ी का स्वाद लाजबाव होता है। खाना खाने के बाद रबड़ी खाने का मज़ा कुछ और ही है। रबड़ी को मालपुआ, जलेबी और इमरती के साथ भी खाते हैं। आम तौर पर रबड़ी बनाने में 1 लीटर दूध के अनुपात में  100 ग्राम चीनी, चौथाई कप बादाम, चौथाई कप पिस्ता डाला जाता है।

 लखनऊ के टूंडे का कबाब आपने खाया होगा। और भी कई शहरों का कबाब बहुत प्रसिद्ध है। पर सासाराम का कबाब उससे कुछ अलग है। ये कबाब घर से बनाकर लाया जाता है और स्टाल वाले इसे प्लेट में परोसते हैं। चिकेन और मटन कबाब महज 10 और 20 रुपये में। कभी सासाराम जाएं तो वहां के कबाब का भी मजा जरूर लें।


सासाराम का अनरसा भी प्रसिद्ध है जी
सासाराम की सबसे प्रसिद्ध मिठाई है अनरसा। ऐसा अनरसा आपको कहीं और खाने को नहीं मिलेगा। अनरसा की दुकानें धर्मशाला रोड पर गोला के पास जाकर आती हैं। वहां एक साथ अनरसा की कई दुकाने हैं। जब आप इस सड़क से गुजरते हैं तो ताजा अनरसे की खूशबु आपको इस ओर खिंचने लगती है। कभी अनरसा को मौसमी मिठाई माना जाता था। पर सासाराम में अब सालों भर अनरसा मिलता है। यहां से खरीदे गए अनरसा को छह दिनों तक रखा जा सकता है।
गोला अनरसा का खाते समय कुरकुरा के साथ-साथ अन्दर से मुलायम होता है। गोल अनरसे बनाने के लिए आटे से छोटी छोटी लोइयां लेकर, तिल में लपेट कर, गोल करके, 4-5 अनरसे कढ़ाई में डाला जाता है। इसका स्वाद बाकी मिठाइयों से एकदम अलग होता है। अनरसा बनाने में चावल, चीनी, दही, घी और तिल का इस्तेमाल होता है। कई बार इसमें मैदा भी मिलाया जाता है। अनरसा खास तौर पर दीपावली के समय खाई जाने वाली मिठाई है। जब इन अनरसों में खोया मिला दिया जाता है तब इन्हें मावा अनरसा कहते हैं। ये सामान्य अनरसे की अपेक्षा अधिक नर्म और स्वादिष्ट होते हैं।


लिट्टी का अपना अलग अंदाज
वैसे तो लिट्टी और चोखा दक्षिण बिहार और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर झारखंड के अधिकांश शहरों में बिकती हुई दिखाई देती है। पर यह बिहार का अति लोकप्रिय व्यंजन है। पर कोयले पर पकी लिट्टी को सासाराम में खाने का अलग अंदाज है। सासाराम में लिट्टी को पकाने के बाद इसको बीच से काट कर गर्म तवे पर घी में सेंका जाता है। काफी देर सेंकने के बाद इस लिट्टी का स्वाद बदल जाता है। रेलवे स्टेशन के बाहर धर्मशाला चौराहे पर आप इस तरह की लिट्टी का भी स्वाद ले सकते हैं। 

-         विद्युत प्रकाश मौर्य (ईमेल - vidyutp@gmail.com) 
(SASARAM, RABARI, KABAB, ANARSA, LITTI CHOKHA ) 

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