Friday, April 18, 2014

तीन शताब्दी से चल रही है कोलकाता में ट्राम

कोलकाता में ट्राम संचालन का इतिहास तीन शताब्दियों का है। 1873 में शहर में ट्राम चलाने की पहली कोशिश हुई। 24 फरवरी 1873 को पहली ट्राम पटरियों पर चली थी। सियालदह से आर्मेनिया घाट के बीच 2.4 मील का ट्राम ट्रैक माल ढुलाई के लिए बनाया गया था। हालांकि तब ये सेवा लोकप्रिय नहीं हुई और उसे 20 नवंबर को बंद कर दिया गया।
प्रारंभ में ट्राम को खींचते थे घोड़े। 
1880 में कोलकाता ट्रामवेज कंपनी ( सीटीसी) का गठन हुआ। सियालदह से आर्मेनिया घाट के बीच डलहौजी स्क्वायर, स्ट्रैंड रोड होते हुए मीटर गेज पर ट्राम चलाई गई जिसे घोड़े खींचते थे। एक नवंबर 1880 को ट्राम सेवा का उदघाटन वायसराय लार्ड रिपन ने किया। 1882 में स्टीम लोको से ट्राम का संचालन शुरू किया गया। 19वीं सदी के अंत में सीटीसी के पास 186 ट्राम कार, 1000 घोड़े, 7 स्टीम इंजन और 19 मील का ट्राम नेटवर्क था। साल 1900 में ट्राम रुट के विद्युतीकरण की शुरूआत की गई। तब इसे मीटर गेजसे बदल कर स्टैंडर्ड गेज पर (  4फीट 8.5 इंच) लाया गया। 1905 तक पूरा ट्राम ट्रैक विद्युतीकृत हो चुका था। 

1943 न्यू हावड़ा ब्रिज के बनने पर ट्राम हावड़ा स्टेशन पर भी हावड़ा पुल होते हुए पहुंच चुकी थी। हालांकि 1992 में ट्राम को हावड़ा ब्रिज से ट्रैफिक और पुल पर संकट का हवाला देते हुए हटा दिया गया। 1943 में ट्राम का कोलकाता शहर में 67.3 किलोमीटर के दायरे में विस्तार था। यह कोलकाता के सभी प्रमुख इलाकों को कवर करती थी। आजादी के बाद 1951 में कोलकाता ट्रामवे कंपनी पश्चिम बंगाल सरकार के अधीन गई। 1970 में नीमतल्ला घाट और हावड़ा में कुछ इलाकों में ट्राम सेवा बंद कर दी गई। कुल ट्राम रूट घट कर 62.08 किलोमीटर रह गया। 1986 में दक्षिण में ट्राम का विस्तार बेहाला से जोका तक किया गया।1992 में कोलकाता ट्रामवे कंपनी ने अपनी बसें भी चलानी शुरू कर दीं।


90 किलोमीटर हो सकती है अधिकतम गति - विशेषज्ञों के अनुसारअन्य वाहनों की तरह ट्राम भी 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने की क्षमता रखती हैपर उसकी पटरियों पर अन्य वाहनों के अतिक्रमण एवं शहर की भीड़-भाड़ सुस्त यातायात व्यवस्था के कारण ट्राम को  से 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने के लिए मजबूर होना पड़ता है। ट्रामों की रफ्तार तेज करने एवं ट्राम की पटरियों पर से अन्य गाड़ियों को चलने से रोकने के लिए पुलिस कभी भी हमारी मदद नहीं करती है।
-    विद्युत प्रकाश मौर्य
( KOLKATA , TRAM, RAIL, BENGAL, METRO ) 

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