Sunday, April 13, 2014

झुकना जान जाओगे तो जीना सीख जाओगे

जो पेड़ झुकना नहीं जानते तूफानों में टूट जाते हैं। ये किताबों में पढ़ा था। कोलकाता की सड़कों पर घूमते हुए विक्टोरिया मेमोरियल के सामने घूमते हुए बेटे ने जिद की गोला खाएंगे। विक्टोरिया के सामने कतार में गोला की कई दुकाने हैं। गोला खाने के बाद अनादि हाथ धोना चाहते थे। दुकानदार ने पानी दिया। हाथ धोते हुए उनके कपड़े गिले हो गए। दुकानदार ने कहा हाथ थोड़ा झुक कर धोना चाहिए। फिर बोले, थोड़ा झुकना जान जाओगे तो जीना सीख जाओगे। सचमुच जीवन का बड़ा पाठ है। ढेर सारी लड़ाइयां तो इसी बात को लेकर होती है क्योंकि हम थोड़ा झुकना नहीं चाहते।


गोला का दुकान चलाने वाले लखेंद्र पटना के पास के लोदीपुर के रहने वाले हैं पिछले 38 सालों से कोलकाता में गोला की दुकान चला रहे हैं। अब कोलकाता के ही हो गए हैं।
अब बात विक्टोरिया मेमोरियल की। कोलकाता के हृदय स्थल मैदान इलाके में बना विक्टोरिया मेमोरियल दशकों से कोलकाता के प्रेमी प्रेमिकाओं के मिलने वाले स्थल के तौर पर जाना जाता है। पर इस इमारत के अंदर ब्रिटिश राज का अनूठा संग्रहालय है। संग्रहालय घूमने का टिकट 8 रुपये का है। सिर्फ पार्क घूमने का 4 रुपये का। संग्रहालय सोमवार को बंद रहता है।
विक्टोरिया मेमोरियल क्वीन विक्टोरिया के शाही जीवन का झरोखा हैयह भारत में अंग्रेजी राज को दी गई एक श्रद्धांजलि है। इसका डिजाइन ताजमहल पर आधारित था। 
1906 में कोलकाता घूमने निकले जॉर्ज पंचम ने वास्तु कला के इस उद्भुद स्मारक के लिए आधारशिला रखी थी। यह 1921 में पूरा हुआ। यहां रानी के पियानो और स्टडी-डेस्क सहित 3000 से अधिक वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं।


विक्टोरिया के बाहर सजे धजे तांगे दिखाई देते हैं। इन तांगों को विक्टोरिया या फिटन भी कहा जाता है। तांगे वालों का यह कारोबार भी उतना ही पुराना है जितनी विक्टोरिया मेमोरियल की इमारत। कोलकाता घूमने आने वाले लोग इन तांगों में बैठकर विक्टोरिया के चक्कर लगाते हैं।


-    विद्युत प्रकाश मौर्य
( KOLKATA, BENGAL, VICTORIA MEMORIAL ) 

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