Sunday, March 30, 2014

दशमेश पिता गुरु गोबिंद सिंह की जन्मस्थली - पटना साहिब

पटना में दसवें गुरु की याद में बना है हरि मंदिर साहिब गुरुद्वारा।  सिख इतिहास में पटना साहिब का खास महत्व है। सिखों के दसवें और अंतिम गुरू, गुरू गोबिंद सिंह जी का जन्म यहीं 22 दिसंबर 1666 में हुआ। यहां बना गुरुद्वारा सिखों के पांच तख्तों में से एक है। पांच तख्तों में दरबार साहिब अमृतसर के बाद इसका दूसरा स्थान है। बाकि के तीन तख्त आनंदपुर साहिब, तलवंडी साबो और नांदेड़ साहिब (महाराष्ट्र) में हैं। सिक्खों के आखिरी गुरु, गुरु गोविंद सिंह जी का जन्म पटना में हुआ और यहीं उनका बचपन गुजरा । पटना का हरमंदिर साहिब उन्हीं की याद में बनाया गया है जहाँ उनके स्मृति चिन्ह हैं। 



पटना का तख्त श्री हरिमंदिर साहिब पटना सिटी में चौक के पास झाउगंज मुहल्ले में स्थित है। कभी ये इलाका कूचा फरूख खान के नाम से जाना जाता था। अब इसे हरमंदिर गली के रूप में जाना जाता है। इसके आसपास तंग गलियों में व्यस्त बाजार है। श्री गुरूगोबिंद सिंह जी का जन्म अपने ननिहाल में ही हुआ। नौंवे गुरू तेगबहादुर यहां अपने मामा कृपाल जी और माता गुजरी के साथ सासाराम गया होते हुए यहां पधारे थे। श्री गुरूगोबिंद सिंह जी का जन्म अपने ननिहाल में ही हुआ। पटना में पालन पोषण होने के कारण दसवें गुरू गोबिंद सिंह बचपन में बिहारी हिंदी बोलते थे। 

ऐतिहासिक चोला साहिब- पटना के हरिमंदिर साहिब में जब आप जाएंगे तो आपको यहां ऐतिहासिक चोला साहिब देखने को मिलेगा। ये चोला गुरू गोबिंद सिंह जी ने 15 साल की उम्र में धारण किया था। लंबे समय तक ये चोला खंडवा ( मध्य प्रदेश ) के एक श्रद्धालु के पास सुरक्षित रहा बाद में उसने इस चोला को पटना के हरिमंदिर साहिब को दिया। सिख श्रद्धालु अपने जीवन में एक बार हरिमंदिर साहिब आकर खुद को धन्य मानते हैं।



हरि मंदिर साहिब में एक अजायब घर भी है। गुरुगोबिंद सिंह जी का बचपन में नाम गोबिंद राय था। उनका माता का नाम माता गुजरी था। गुरूगोबिंद सिंह पिता गुरू तेग बहादुर की मृत्यु के उपरान्त महज नौ साल की उम्र 11 नवम्बर सन 1675 को गुरू बने। वे एक महान योद्धा, कवि एवं आध्यात्मिक नेता थे। उन्होने सन 1699 में बैसाखी के दिन खालसा पन्थ की स्थापना की जो सिखों के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है। साल 2017 में दसम पिता के जन्म का 350 साल पूरे हो गए हैं। 


पटना में हरिमंदिर साहिब के आसपास के रास्ते का अगर थोड़ा सौंदर्यीकरण कर दिया जाए तो इस ऐतिहासिक धार्मिक स्थल को और खूबसूरत बनाया जा सकता है। पटना शहर और आसपास हरिमंदिर साहिब के अलावा सात और गुरूद्वारे हैं जिनका सिख धर्म में ऐतिहासिक महत्व है। पटना साहिब आने वाले सिख श्रद्धालु उन्हें भी देखने जाते हैं।

कैसे पहुंचे - निकटतम रेलवे स्टेशन पटना साहिब है। वैसे आप गुलजारबाग, राजेंद्रनगर, पटना जंक्शन, पाटलिपुत्र या फिर दानापुर से उतरकर भी यहां पहुंच सकते हैं। वायुसेवा से आने पर पटना में लोकनायक जय प्रकाश नारायण हवाई अड्डा भी है। यहां गुरुद्वारा तकरीबन 15 किलोमीटर है।

पटना के अन्य गुरुद्वारे -  पटना साहिब में गुरुगोबिंद सिंह के जन्मस्थान गुरुद्वारा के अलावा गुरुद्वारा बाल लीला और गायघाट का गुरुद्वारा देखा जा सकता है। यहां से 20 किलोमीटर आगे दानापुर में गुरुद्वारा हांडी साहिब स्थित है। पटना के आसपास राजगीर में गुरुनानक देव जी से जुड़ा हुआ गुरुद्वारा शीततल जल कुंड स्थित है। वहीं पटना से 160 किलोमीटर दूर सासाराम में नवम गुरु गुरुतेगबहादुर से जुड़ा हुआ गुरुद्वारा चाचा फग्गूमल स्थित है।  गुरु नानक देव के दूसरे पुत्र द्वारा वैशाली जिले के लालगंज शहर के रेपुरा मोहल्ले में गुरुद्वारा की स्थापना की गई थी। पर यह नानकशाही गुरुद्वारा आज खस्ताहाल है।
बिहार में सिख इतिहास से जुड़े गुरुद्वारे
-   पटना सिटी क्षेत्र -  तख्त श्री हरिमंदिर साहिब, गायघाट गुरुद्वारा, पटना। गुरु का बाग, मालसलामी (कभी नवाब करीमबक्श रहीम बक्श का बाग हुआ करता था)  कंगन घाट गुरुद्वारा। बाल लीला गुरुद्वारा 
-          गुरुद्वारा हांडी साहिब, दानापुर ( पंजाब जाने के क्रम में पहली बार गुरु गोबिंद सिंह जी यहां रुके थे)
-          नानकशाही गुरुद्वारा, रैपुरा, लालगंज (वैशाली)
-           नानकशाही गुरुद्वारा, फतुहा ( गुरुनानक देव जी और कबीर की यहां हुई थी मुलाकात)
-           गुरुद्वारा चाचा फग्गूमल,  सासाराम,  गुरुद्वारा गुरु का बाग और गुरुद्वारा टकसाली संगत।
-           गुरुद्वारा नानकशाही संगत, अकबरपुर, रजौली संगत, नवादा
-          राज्य के भागलपुर, कटिहार, गया और मुंगेर में भी ऐतिहासिक गुरुद्वारे हैं । 



 - विद्युत प्रकाश मौर्य
तख्त श्री हर मंदिर साहिब की वेबसाइट- 

( PATNA SAHIB, GURU GOBIND SINGH, TENTH GURU ) 

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