Monday, March 31, 2014

ताजगी का प्रतीक है पुदीना

छोटे-छोटे हरे हरे पत्ते में गुण बहुत हैं। लोग पुदीना की चटनी बना कर खाते हैं। पुदीना के गुणों के कारण इसके स्वाद वाली कैंडी और च्यूंगम कंपनियां बनाने लगी हैं। पिपरमिंट जैसा शीतलन प्रभाव के कारण इसे कैंडी और सांसों ताजगी के लिए बड़ा अच्छा माना जाता है। कई लोग ताजी पुदीने की पत्ती को चबाते हैं तो कई लोग पुदीने की स्वाद वाली चाय पीना पसंद करते हैं। पुदीना पाचन को आसान बनाते है साथ ही जाड़े की ठंड के कारण होने वाली रक्त की संकुलता से भी निजात दिलाता है। अधिकांश टूथपेस्ट कंपनियां पुदीने के इस गुण का इस्तेमाल करती हैं वहीं इसके अपने विज्ञापनों में भी प्रमुखता से बताती हैं।

पुदीना का बायोलाजिकल नाम मेन्था पिपेरिटा है। पर इसकी लगभग 25 प्रजातियां पाई जाती हैं। इसकी प्रजातियां यूरोप और एशिया में स्वदेशी हैं। पुदीने का इतिहास बड़ा पुराना है। सदियों से लोग इसका सेवन करते रहे हैं।
लोकश्रुति - एक यूनानी कथा के अनुसार मेंथे नामक एक परी इतनी सुंदर थी कि पाताल लोक का मालिक हैदस उसपर आकर्षित हो गया। हैदस ने मेंथे के साथ अवैध संबंध बना लिए। जब हैदस की पत्नी को इस रिश्ते के बारे में पता चला तो इसने शाप देकर मेंथे को एक छोटे से पौधे के रुप में परिवर्तित कर दिया ताकि लोग उसे पैरों से कुचल सकें। जब हैदस को इसके बारे में पता चला तो उसके जादू को तो वह खत्म नहीं कर सका पर उसने मेंथे को अनूठी खूशबु प्रदान कर दी। अब जब मेंथे को पैरों से कुचला जाता है तो उसकी खूशबु हवा में फैल जाती है।
पुदीने के इस्तेमाल सदियों से सब्जी को स्वादिष्ट बनाने पर और रसोई घर में मसाले के प्रमुख घटक के रुप में किया जा रहा है। जापान के लोग इसके तेल का इस्तेमाल मेंथेनाल बनाने में करते रहे हैं। हीपोक्रेटिस ने इसके बारे में लिखा है कि लोग इसका इस्तेमाल दांतो की सफाई के लिए करते हैं।
पुदीने के कई इस्तेमाल
प्रचीन काल से ही पुदीने के इस्तेमाल मसाले और दवा दोनों के रुप में होता रहा है। दुनिया भर में इससे चाय, शीतल पेय, जेली, सीरप, आइसक्रीम, मुरब्बा और मेमने के व्यंजनों में किया जाता है। रसोई घर में चाट मसाला, हरे पुदीने की चटनी और थाई करी में इसका इस्तेमाल होता रहा है।
पुदीना बहुत सी सब्जियों जैसे नए आलू, टमाटर, गाजर और मटर के साथ आसानी से मिल जाता है। इसकी कटी पत्तियां सलादों को ताजगी प्रदान करती हैं। भारत में ताजे पुदीने की चटनी बिरयानी के साथ परोसी जाती है तो अरब वासी पुदीने की चाय का आनंद लेते हैं।
पुदीना के औषधीय गुण
पुदीना पीड़ानाशक, उद्दीपक और भूख बढ़ाने वाला माना जाता है। पिपरमिंट के निर्माण में मेंथाल का सर्वाधिक प्रयोग होता है। पुदीने का नियमित इस्तेमाल जुकाम, फ्लू और बुखार में फायदेमंद है। यह अवश्य ध्यान रखना चाहिए कि शिशुएं के लिए हानिकारक हो सकता है। पुदीने के पिपरमिंट का इस्तेमाल च्यूंगम बनाने में होता है जो ताजगी प्रदान करता है।
--- माधवी रंजना
(MENTHA, PUDINA, MINT ) 

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