Tuesday, March 11, 2014

आरा सासाराम लाइट रेलवे का इंजन ((4))

आरा सासाराम लाइट रेलवे मार्ग पर लोकोमोटिव यानी इंजन के तौर पर भाप इंजन का इस्तेमाल किया जाता था। इस रेल मार्ग पर हंसले ( HUNSLET)  और के बनाए लोको इस्तेमाल में लाए जा रहे थे। छोटी रेलगाड़ियों में रूचि रखने वाले लंदन के एक लेखक लारेंस जी मार्शल ने भारत के अलग अलग हिस्सों की लंबी यात्रा कर स्टीम इंजनों पर अध्ययन किया। इस दौरान वे आरा सासाराम लाइट रेलवे को भी देखने आए। इस समय इस लाइट रेलवे में हंसले द्वारा निर्मित 2-4-2 टैंक नंबर 5 इंजन इस्तेमाल किया जा रहा था। यह इंजन हंसले कंपनी ने 1910 में बनाया था। हंसले ब्रिटेन की कंपनी है जो दुनिया के कई देशों में नैरो गेज लाइनों के लिए खास तौर पर स्टीम लोकोमोटिव (इंजन) का निर्माण करती थी। कंपनी ने नैरो गेज के लिए दुनिया भर के देशों में 20 हजार के करीब इंजनों का निर्माण किया। इस लोको की धुआं उगलने वाली चिमनी को खास तौर पर डिजाइन किया गया था जिसके पीछे किसी तरह का धार्मिक और राजनीतिक विश्वास निहीत था। (( INDIAN NARROW GAUGE STEAM REMEMBERED, By Lawrence G Marshall  page 51)  

1970 में आरा सासाराम लाइट रेलवे के पास कुल सात लोकोमोटिव ( इंजन) थे जिनकी मदद से आरा सासाराम के बीच पैसेंजर ट्रेनों का संचालन हो रहा था। एक पैसेंजर ट्रेन में अमूमन छह से आठ डिब्बे होते थे।
मार्शल एक और लोकोमोटिव का जिक्र करते हैं जिसका माडल नंबर 0-6-2 है। इसका निर्माण एवनसाइड नामक ब्रिटिश लोको कंपनी ने मूल रुप से 1928 में किया था। ये इंजन बख्तियारपुर बिहार शरीफ लाइन पर रेलवे में चलाया जा रहा था। पर 1962 में इस रेलमार्ग के बंद होने के बाद इसका लोकोमोटिव आरा सासाराम लाइट रेलवे की सेवा में लाया गया। 1945 से 1955 के बीच इस लोकोमोटिव की विस्तारित तरीके से ओवरहालिंग यानी मरम्मत की गई थी। उसके बाद ये इंजन एक बार फिर अपनी सेवाएं देने के लिए तैयार हो गया।

एवनसाइड दूसरी प्रमुख कंपनी थी जिसके लोको का इस्तेमाल आरा सासाराम लाइट रेलवे में किया जा रहा था। आरा सासाराम लाइट रेलवे में मार्टिन एंड कंपनी ने अपनी दूसरी परियोजना शहादरा सहारनपुर रेलवे लाइन के बंद होने उसके अनुपयोगी हो चुके लोकोमोटिव को भी बिहार में लाकर संचालन शुरू कर दिया।

- विद्युत प्रकाश मौर्य ( ASLR 4)
(ARA SASARAM LIGHT RAILWAY, MARTIN AND BURN, BIHAR )  

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