Saturday, March 1, 2014

माथेरन - अंगरेजों का पसंदीदा हिल स्टेशन

नई दिल्ली के रेल संग्राहलय में माथेरन लाइट रेलवे का एक लोकोमोटिव 
माथेरन ब्रिटिश राज में गर्मियों में छुट्टियां बीताने का लोकप्रिय स्थान बन चुका था। यह मुंबई में पदस्थापित ब्रिटिश अधिकारियों की बड़ी पसंद  में शामिल था। कारण था कि मुंबई के निकट बेहतरीन जलवायु वाली जगह थी माथेरन।

 नेरल माथेरन के बीच इस रेल मार्ग पर कुल 121 छोटे-छोटे पुल बनाए गए हैं। वहीं पूरे 19 किलोमीटर से ज्यादा के मार्ग में कुल 221 मोड़ आते हैं। चूंकि यह ट्रेन तेजी से ऊंचाई पर चढ़ाव लेती है इसलिए इस मार्ग पर चलने वाली ट्रेनों की अधिकतम गति 20 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा नहीं रखी जाती है।

नेरल माथेरन रेल मार्ग तीन हिस्सों में बंटा हुआ है। मार्ग का ज्यादातर हिस्सा संरक्षित वन क्षेत्र है। नेरल से जुम्मापाटी का पहला हिस्सा 5 किलोमीटर का है। 241.81 मीटर की ऊंचाई पर जुम्मापाटी में इस रेल मार्ग का 18 मीटर का तीखा मोड़ आता है।

दूसरा खंड 12 किलोमीटर का जुम्मापाटी से अमन लॉज के बीच का इलाका है। इस मार्ग पर बेखरा खुद जो घोड़े के नाल जैसी आकृति है आती है। इसी मार्ग पर वन किस टनेल आता है। सुंरग 10.25 से 11 किलोमीटर के बीच में आती है। 483.13 मीटर की ऊंचाई पर वाटर पाइप स्टेशन आता है। इसी के आसपास माउंट बेरी और पैनोरमा प्वाइंट आते हैं। जहां आप कुदरत के दिलकश नजारे देख सकते हैं।

वाटर पाइप स्टेशन –यहां पानी खत्म हो जाता था...

नेरल माथेरन मार्ग पर स्थित वाटर पाइप रेलवे स्टेशन के नामकरण की कहानी दिलचस्प है। जब स्टीम इंजन का दौर था तब यहां आते आते लोको का पानी खत्म हो जाता था। तब इस जगह पर इंजन को पाइप से दुबारा पानी उपलब्ध कराया जाता था। हालांकि अब इस मार्ग पर डीजल लोको चलाए जा रहे हैं। पर वाटर पाइप रेलवे स्टेशन का नाम अब भी बदस्तूर पुकारा जा रहा है। हालांकि इस स्टेशन पर उतरने चढ़ने वाले लोग ज्यादा नहीं होते पर यहां रेल यात्रियों को चाय मिल जाती है।


अमन लॉज वह जगह है जहां सडक समाप्त हो जाती है। इस स्थल के बाद आगे माथेरन जाने के लिए किसी भी डीजल पेट्रोल चलित वाहन को आगे नहीं जाने दिया जाता है। निजी वाहनों से आने वाले लोगों के लिए यहां पार्किंग की सुविधा उपलब्ध है। यहां आगे का सफर पैदल का है। हां आप रेल से माथेरन रेलवे स्टेशन से तक जा सकते हैं। अमन लॉज से माथेरन के बीच 2.83 किलोमीटर की रेलवे लाइन है। माथेरन 803.98 मीटर की ऊंचाई पर इस मार्ग का सबसे ऊंचा रेलवे स्टेशन है। ये रेलवे की विरासत का अदभुत नमूना है। 

माथेरन रेल की बदलती तकनीक 
जब 1907 में नेरल माथेरन नैरो गेज रेल मार्ग का सफर आरंभ हुआ तब इसमें इस रेल मार्ग के लिए खास तौर पर स्टीम इंजन डिजाइन किए गए। इस रेलमार्ग के कंसल्टिंग इंजीनियर एडवर्ड कालट्रोप ने 0-6-0 माडल का इंजन तैयार कराया जिसके वजन 7 टन के आसपास था। कुल चार लोकोमोटिव का निर्माण जर्मनी की प्रसिद्ध कंपनी ओरेनस्टोन एंड कोपेल (  एंड के ) द्वारा खास तौर पर इस रेल मार्ग के लिए किया गया।

नेरल माथेरन का एक कोच। फोटो- अनादि अनत।
ये लोकोमोटिव 1982 तक अपनी सेवाएं दे रहे थे। बाद में एक लोको 0-4-0 दार्जिलिंग टाइप का भी आया थाहालांकि 1924-26 में दार्जिलिंग टाइप लोकोमोटिव को सेवा से हटा लिया गया।
डीजल लोको का दौर - 1956 में इस लाइन के लिए तीन डीजल इंजन खरीदे गए। अब यह मार्ग पूरी तरह डीजल लोको से ही संचालित किया जा रहा है। 1983 में इस रेल मार्ग पर स्टीम लोको को पूरी तरह से हटा दिया गया। अब इस मार्ग पर एनडीएम 1 माडल का डीजल इंजन चलाया जा रहा है जिसे 1956 में जंग नामक कंपनी ने बनाया है। नेरल में इस नैरो गेज रेलवे स्टेशन का वर्कशाप, लोकोमोटिव शेड और कैरिज डिपो अवस्थित है।

बारिश के महीनों में बंद हो जाता है रेल मार्ग बारिश के मौसम में एहतियात के तौर पर इस रेल मार्ग को बंद कर दिया जाता है। जून से अक्तूबर महीने तक इस रेल मार्ग पर सेवाएं बंद रहती हैं। पर मौसम  ठीक रहने पर एक रेलगाड़ी चलाई जाती है। हालांकि रेलवे की कोशिश है कि इस मार्ग पर कम समय के लिए रेलगाड़ियां बंद करनी पड़े।
दो साल बंद रहा मार्ग - 2005 में बाढ़ से हुई हानि के बाद 5 मार्च इस रेल मार्ग को बंद करना पड़ा था। जरूरी मरम्मत के बाद 15 अप्रैल 2007 में ये रेल मार्ग दुबारा चालू किया जा सका। आजकल इस रेल मार्ग पर तीन जोड़ी गाड़ियां चलाई जा रही हैं।


अब लग्जरी सैलून भी नवंबर 2012 में इस मार्ग पर 5 सीटों वाला लग्जरी फेमिली कोच चलाने की शुरूआत की गई। इस कोच में शानदार सोफा और एलसीडी स्क्रीन लगाया गया है। इसके स्क्रीन पर आने वाली तस्वीरें वे होती हैं जो बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे रिकार्ड करते हैं।

फिल्मों में माथेरन रेल - ये छोटा सा रेल का सफऱ फिल्मकारों की भी पसंद रहा है। 2013 में आई फिल्म गंगूबाई में नेरल माथेरन रेल मार्ग के नजारे कैद किए गए। फिल्म का एक बड़ा हिस्सा इस खिलौना ट्रेन के साथ शूट किया गया है। वैसे तो माथेरन का प्राकृतिक नजारा बालीवुड के निर्माताओं को हमेशा से आकर्षित करता रहता है।
-    विद्युत प्रकाश मौर्य


( WATER PIPE, GANGOOBAI, RAIN, NERAL MATHERAN RAIL -3)

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