Sunday, March 9, 2014

शाहाबाद की शान थी आरा सासाराम लाइट रेलवे... ((1))

भारत में ब्रिटिश राज के दौरान यातायात संचार और व्यापार के साधन के तौर पर सड़कों के विकास के साथ साथ रेलमार्ग के जाल बिछाने पर पर्याप्त ध्यान दिया गया। इसी सिलसिले में बिहार के शाहाबाद जिले में दो लाइट रेलवे नेटवर्क की स्थापना बीसवीं सदी के शुरूआत में की गई। इनमें पहली आरा सासाराम लाइट रेलवे थी तो दूसरी डेहरी रोहतास लाइट रेलवे।
कई दशक तक बिहार के पुराने शाहाबाद  जिला जो अब भोजपुर और रोहतास जिला कहलाता है के  लोगों के आंखों का तारा बनी रही आरा सासाराम लाइट रेलवे अब इतिहास के पन्नों में समा चुकी है। 1914 में शुरू हुई इस छुक छुक गाड़ी ने 1978 में पटरियों पर अपना आखिरी सफर पूरा किया। लेकिन जिन लोगों का बचपन और युवावस्था के दिन इस रेल की छुक छुक के साथ गुजरा है उनके जेहन में उसकी कई स्मृतियां ताजी हैं।

किसी समय में ये रेल भोजपुरी समाज के लोकरंग का अंग बन गई थी। शाहाबाद क्षेत्र के कई गांवों में तो इस महबूब रेल पर भोजपुरी में गीत भी रचे गए थे। आरा सासाराम लाइट रेलवे का सफर बीर कुअंर सिंह के आरा से शुरू होकर शेरशाह की नगरी सासाराम में खत्म होता था। तब आरा शाहाबाद जिले का मुख्यालय और सासाराम इस जिले का एक सब डिविजन हुआ करता था। दोनों शहरों के बीच की दूरी 100 किलोमीटर है। हालांकि अब इस मार्ग पर लंबे संघर्ष के बाद 2008 बड़ी लाइन बिछाई जा चुकी है और इस मार्ग पर पैसेंजर ट्रेनें फिर चलने लगी है। पर 1978 के बाद तीन दशक तक ये मार्ग रेल विहीन रहा।

आज का आरा रेलवे स्टेशन 
आरा से सासाराम के बीच लाइट रेलवे के स्टेशन हुआ करते थे - उदवंतनगर, कसाप, गड़हनी, चरपोखरी, पीरो, हसन बाजार, बिक्रमगंज, संझौली, गढनोखा, आदि। 1978 से पहले इस रेल मार्ग पर बड़े पैमाने पर यात्री परिवहन हो रहा था।

1976 में शाहाबाद जिला विभाजित होकर भोजपुर और रोहतास दो जिले बनाए गए, तब ये रेलमार्ग दो जिला मुख्यालय आरा और सासाराम को जोड रही थी। हालांकि इस मार्ग पर चलने वाली पैसेंजर ट्रेनों की गति ज्यादा नहीं थी पर यह रेलमार्ग आसपास के कई सौ गांवों के लोगों के लिए यातायात का प्रमुख साधन था।

मजे की बात कि इस रेल की अधिकतम स्पीड इतनी ही थी कि कोई साइकिल वाला साथ चलती सड़क से इसके साथ मुकाबला कर लेता था। आरा सासाराम लाइट रेलवे पर चलने वाली पैसेंजर ट्रेनों की गति औसतन 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे के बीच होती थी। आगे के कड़ियों  पढ़िए इस रेल नेटवर्क के बारे में कुछ और रोचक बातें।

-    विद्युत प्रकाश मौर्य (ASLR1)
(ARA SASARAM LIGHT RAILWAY, MARTIN AND BURN, BIHAR ) 

No comments:

Post a Comment