Monday, February 24, 2014

रोशनी की देवी - नैना देवी


नौ देवियों में प्रमुख नैना देवी को रोशनी की देवी माना जाता है। नैना देवी का मंदिर हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में शिवालिक पर्वत मालाओं के बीच स्थित मनोरम वादियों में स्थित है। नैना देवी का मंदिर  51 शक्तिपीठों में से एक हैं।यह हिमाचल के बिलासपुर जिले में समुद्रतल से 1177 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। 
बस स्टैंड से करीब सवा किलोमीटर की चढ़ाई के बाद सबसे ऊंची चोटी पर माता का मंदिर स्थित है। सफेद रंग के सुंदर मंदिर को संगमरर से मढ़ा गया है। मुख्यद्वार के दोनों तरफ माता की सवारी शेर विराजमान हैं। मंदिर के गर्भगृह में मध्य में नैना देवी और बायीं और दायीं और मां काली और गणेश जी की प्रतिमाएं हैं। गर्भ गृह में माता की मूर्ति में उनके दो आंखों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है। 
सैकड़ो साल पुराना पीपल का पेड़- 
मंदिर से लगा हुआ एक पीपल का पेड़ है जो सैकड़ो साल पुराना है। यह पीपल का पेड़ मंदिर के सौंदर्य को और बढ़ा देता है। मंदिर परिसर में 70 फीट लंबी एक गुफा भी है। मंदिर के पास खप्पर महिषासुर कुंड, कृपाली कुंड आदि भी देखे जा सकते हैं। 

सती के दोनों नेत्र गिरे थे यहां  कहा जाता है कि यहां सती के दो नेत्र गिरे थे इसलिए नाम है नैना देवी।कहा जाता है कि नैना गूजर देवी का बड़ा भक्त था। जब अपनी गाय चराते हुए वह वर्तमान मंदिर स्थल के पास पहुंचा तो उसकी अनब्याही गायों से अपने आप दूध निकलने लगे। इसे देवी का चमत्कार मानकर उस स्थल को हटाया तो वहां पिंडी रूप में उसे देवी के दर्शन हुए। तब माता ने उसे सपने में आकर इस स्थल पर मंदिर बनवाने को कहा। उनकी इच्छा से पहाडों पर माता का सुंदर मंदिर बना है। नैना देवी के मंदिर में श्रावण मास के अष्टमी पर सर्वाधिक श्रद्धालु पहुंचते हैं।


500 सीढ़ियों की लंबी चढ़ाई - नैना देवी के मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को बस स्टाप से 500 से ज्यादा सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। ये सीढ़ियां हालांकि सीधी नहीं हैं। घुमावदार सीढ़ियों के आसपास लोगों के घर और बाजार भी आते हैं। आप धीरे-धीरे आराम फरमाते हुए नैना देवी के दरबार तक पहुंच सकते हैं।

रोपवे से पहुंचे नैना देवी - नैना देवी के बस स्टैंड से नैना देवी के मंदिर तक अब नैनादेवी रोपवे से भी पहुंचा जा सकता है। इसका टिकट 170 रुपये प्रति व्यक्ति ( जाना और आना ) है। गणपति रोपवे और दामोदर रोपवे कोलकाता के सौजन्य से यहां रज्जु मार्ग का संचालन किया जाता है। यह सेवा 1997 में आरंभ हुई। इस रोपवे में कुल 24 केबिन बने हुए हैं। गरमी में सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे तक और सरदियों में सुबह 9 बजे से रोपवे की सेवा उपलब्ध रहती है।
अब नैना देवी और आनंदपुर साहिब शहर के बीच लंबा रोपवे यानी रज्जुमार्ग बनाने का भी प्रस्ताव है। ऐसा होे पर यह सैलानियों के लिए बड़ा आकर्षण का केंद्र बन जाएगा।  नैना देवी के मंदिर चैत्र और आश्विन नवरात्र के समय श्रद्धालुओं की सर्वाधिक भीड़ उमड़ती है। उस दौरान दिन रात यहां मेले जैसा वातावरण रहता है।

कैसे पहुंचे - यहां पहुंचने का सुगम रास्ता पंजाब के रुपनगर जिले में नंगल से है। जो श्रद्धालु आनंदपुर साहिब जा रहे हों तो वहां से नैना देवी कुछ किलोमीटर की ही दूरी पर हैं। आनंदपुर साहिब के आगे नंगल आता है। वही नंगल जहां भाखड़ा नदी पर विशाल भाखड़ा डैम बना है। इस डैम से होकर नैना देवी का रास्ता आगे जाता है। नंगल के आगे का आप पंजाब से हिमाचल प्रदेश में प्रवेश कर जाते हैं। आगे का रास्ता पहाड़ी और मनोरम है।

कहां ठहरें - नैना देवी के मंदिर के पास रहने के लिए मंदिर की धर्मशाला में निशुल्क आवासीय सुविधा उपलब्ध है। मंदिर ट्रस्ट की ओर से मातृ शरण और मातृ आंचल नामक दो अतिथिगृह का निर्माण कराया गया है जहां किराया देकर ठहरा जा सकता है। वहीं मंदिर के आसपास के लोग श्रद्धालुओं को उचित राशि लेकर अपने घरों में ठहरने के लिए भी कमरा उपलब्ध करा देते हैं। आप मंदिर के पास पहुंचेंगे तो कई लोग कमरा देने का प्रस्ताव लेकर आपके पास आते हैं।
पहली बार नैना देवी के द्वार पर-  साल 2002 में जब मैं पहली बार जालांधर से नैनादेवी के दर्शन के लिए पहुंचा तो होशियारपुर, उना नंगल होते हुए बसें बदलकर नैना देवी पहुंचते हुए शाम हो गई थी। इसलिए सीढ़ियों से माता के भवन तक पहुंचने के बाद मैंने एक कमरा ले लिया किराये पर 70 रुपये में। शाम को मंदिर में दर्शन के बाद मंदिर ट्रस्ट के लंगर में भोजन किया। रात नैनादेवी मंदिर के प्रचीर से आनंदपुर साहिब शहर का नजारा करना अदभुत लगा। हालांकि तब मैंने आनंदपुर साहिब शहर का दौरा नहीं किया था। पर ऊंचे पहाड़ों से देखते हुए इस पवित्र शहर में जाने की इच्छा जागृत हो उठी।
मंदिर प्रशासन की ओर से लंगर भी -  नैना देवी मंदिर प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं के लिए निशुल्क लंगर भी चलाया जाता है। लंगर का समय तय है। इसमें सुबह का नास्ता, दोपहर का भोजन और रात्रि भोजन परोसा जाता है। नैना देवी की चढ़ाई में थकान हो जाती है। इसलिए कई श्रद्धालु यहां पहुंचने और मंदिर दर्शन के बाद यहीं रूक जाना पसंद करते हैं।
मंदिर ट्रस्ट की दुकान से मिठाई -  मंदिर ट्रस्ट की ओर से संचालित दुकान से आप हलवा, बेसन लड्डू, बर्फी और जलेबी खरीद सकते हैं। मंदिर परिसर में यह दुकान बिना लाभ हानि के 1994 से चलाई जा रही है। यह दुकान मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार के पास स्थित है।

प्नमुख स्थानों से दूरी - पंजाब के आनंदपुर साहिब से नैना देवी की दूरी 24 किलोमीटर है। वहीं पंजाब के नंगल से नैना देवी की दूरी 40 किलोमीटर है। चंडीगढ़ से नैनादेवी की दूरी 115 किलोमीटर है। 
-    विद्युत प्रकाश मौर्य  ( NAINA DEVI, NINE GODDESS, HIMACHAL, PUNJAB, VYAS RIVER, ROAPWAY ) 

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