Saturday, March 22, 2014

पुरी का जगन्नाथ मंदिर

चार धाम में से एक है पुरी का जगन्नाथ मंदिर। यह धाम भी द्वारका की तरह समुद्र तट पर है। यहां विराजते है। भगवान कृष्ण अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ। पुरी एक ओडिशा का एक छोटा सा समुद्र तटीय शहर है। यहां हावडा से या खड़गपुर से पहुंचा जा सकता है। अगर आप चेन्नई की तरफ से आ रहे हैं तो खुर्दा रोड से पुरी पहुंच सकते हैं।


पंडों के बिना पूजा नहीं 
पुरी के जगन्नाथ मंदिर में पूजा पाठ बिना पंडो के नहीं हो पाती। अगर आपका कोई खानदानी पंडा यहां पहले से नहीं है तो भी आपको यहां के पंडे अपना यजमान बना लेंगे। मंदिर में पंडा जी मदद से ही प्रसाद चढ़ाया जाता है। प्रसाद का मतलब मंदिर की रसोई से तैयार भोजन प्रसाद के रुप में यजमान के पूरे परिवार को खाने के लिए मिलता है। आप जिस होटल या धर्मशाला में ठहरे हों मंदिर की रसोई से ये प्रसाद आपके पंडा जी आपके कमरे तक लेकर आएंगे। चलते समय आप अपने अपने पंडा जी को अपनी श्रद्धा से दान आदि दें। कहा जाता है कि पुरी में यदि कोई व्यक्ति यहां तीन दिन और तीन रात ठहर जाए तो वह जीवन-मरण के चक्कर से मुक्ति पा लेता है।

शंकराचार्य जी ने चार पीठों की स्थापना की थी। उत्तर में बद्रीनाथ, दक्षिण में श्रृंगेरी, पूर्व में गोवर्धन तथा पश्चिम में द्वारका। चार धामों में तीन तो उन्हीं में से हैं केवल  श्रृंगेरी के बदले रामेश्वरम को एक धाम माना जाता है। आदि शंकराचार्य (सन 788 – 820) का पुरी में आगमन हुआ। अपनी विद्वत्ता से उन्होंने वहां के बौद्ध मठाधीशों के दांत खट्टे कर दिए और उन्हें सनातन धर्म की ओर आकृष्ट करने में सफल रहे तथा आत्मसात कर लिए गए। शंकराचार्य जी ने यहां अपना एक पीठ भी स्थापित किया जिसे गोवर्धन पीठ कहते हैं​।

कहां ठहरें -  पुरी में ठहरने के लिए सस्ते धर्मशाला भी हैं,या आप समुद्र तट पर किसी अच्छे होटल में ठहर सकते हैं। पुरी के समुद्र तट पर कई सौ होटल हैं। जुलाई में  रथयात्रा के समय जब भगवान अपने मंदिर से निकल कर बलभद्र और सुभद्रा के साथ अपनी मौसी के घर गुंडिचा चले जाते हैं, पुरी में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है। बाकी के 11 महीने में पुरी में ज्यादा भीड़ नहीं होती। पुरी के समुद्र तट पर लोकप्रिय होटलों में से एक है -पुरी होटल। http://www.purihotel.in/ पुरी रेलवे स्टेशन पर हर ट्रेन के पहुंचन के साथ इस होटल की बस यात्रियों को निःशुल्क अपने होटल ले जाने के लिए तैयार रहती है। 
 ------   माधवी रंजना
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