Saturday, March 1, 2014

छुक-छुक ट्रेन से माता वैष्णो देवी के चरणों तक

साल 1995 - वैष्णो देवी के मार्ग पर। 
फरवरी 2014 में जम्मू कश्मीर के कटरा तक सीधे ट्रेन के सफर का सपना साकार हो रहा है। लेकिन माता वैष्णो देवी के चरणों तक का सफर का हमेशा इतना आसान नहीं है।

 पौड़ी चढ़दा जा..जय माता दी बोलता जा..इन नारों के साथ माता के भक्त कटरा से भवन के लिए 14 किलोमीटर का सफर हंसते खेलते तय कर लेते हैं। नौ देवियों में से एक माता वैष्णो देवी सिर्फ जम्मू कश्मीर में बल्कि पूरे उत्तर भारत में सबसे लोकप्रिय देवी बन गई हैं। हर साल यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा होता जा रहा है। इसे देखते हुए कटरा को रेल नेटवर्क से जोड़ने की योजना बनी। अब साल 2014 में श्रद्धालु दिल्ली से सीधे कटरा तक ट्रेन से जा सकते हैं। जम्मू से वाया उधमपुर कटरा तक रेल मार्ग तैयार हो चुका है। यही मार्ग आगे श्रीनगर तक जुड़ जाएगा।
कटरा से भवन का सफर भी धीरे धीरे सुगम होता जा रहा है। पदयात्रा का मार्ग किसी जमाने में कच्ची हुआ करता था। बाद में ये मार्ग पक्की हुआ। पूरे 14 किलोमीटर के मार्ग में जगह जगह खाने पीने के स्टाल बने हैं। थक जाएं तो बैठने के लिए शेड्स। खाने पीने के लिए हर थोड़ी दूर पर रेस्टोरेंट तो चाय काफी के स्टाल।

आधे मार्ग पर आता है अधकुआंरी जहां खाने पीने की विशेष सुविधा है। इसके बाद सांझी छत पर भी अच्छे रेस्टोरेंट बने हुए हैं। अधकुआंवारी, भवन और सांझी छत पर रहने का भी इंतजाम है।
वैष्णो देवी को सबसे पहले राजेश खन्ना की फिल्म अवतार में सिल्वर स्क्रीन पर देखा गया। जागरण गायक नरेंद्र चंचल की आवाज में ...चलो बुलावा आया है...माता ने बुलाया है ....गीत काफी लोकप्रिय हुआ था। इसके बाद टी सीरीज के गुलशन कुमार ने इसे लोकप्रिय बनाया।
अगर सुखद वैष्णो देवी की यात्रा चाहते हैं तो आईआरसीटीसी का पैकेज ले सकते हैं। इसमें कन्फर्म रेल टिकट के साथ यात्रा की पर्ची और कटरा में रहने के लिए होटल बुकिंग की भी सुविधा उपलब्ध है। देखेंwww.irctc.co.in
दिसंबर 1999। सांझी छत  में गीतेश्वर प्रसाद सिंह, विद्युत और सुधीर राघव।

मैं सदभावना रेल यात्रा के साथ 1993 में पहली बार जम्मू पहुंचा पर वैष्णो देवी के दरबार में नहीं जा सका। 1995 में दुबारा रेल यात्रा के साथ जम्मू पहुंचा तो इसबार माता के दर्शन का मौका पहली बार मिला। 1997 में एक बार कटरा पहुंचा, उज्जैन के बाबू सिंह कुशवाहा जी के परिवार के साथ। 1999 के दिसंबर के सर्द दिनों में जालंधर से अपने मित्रों सुधीर राघव और गीतेश्वर प्रसाद सिंह के साथ एक बार फिर माता के दरबार में जाने का कार्यक्रम बना। सर्दियों में कटरा से वैष्णो देवी के भवन की चढ़ाई और मनोरम हो जाती है। 

हमारी चौथी यात्रा हुई जुलाई 2001 में अपने परिवार के साथ। माताजी, पिताजी और भाई बहन। इस यात्रा में बारिश ने घेरा। मार्ग में बादल अटखेलियां करते मिले। 2003 में एक और यात्रा माता के दरबार में विवाह के बाद माधवी के साथ हुई। यह पांचवी यात्रा थी। माता के भवन की हर यात्रा कुछ नई सी लगती है। तभी तो दिल्ली के आसपास के काफी श्रद्धालु हर साल जाते हैं तो कुछ लोग हर महीने दो महीने पर।
-    विद्युत प्रकाश मौर्य 
(VAISHNO DEVI, KATRA,  J&K, SHAKTIPEETH) 

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