Friday, February 21, 2014

51 शक्तिपीठों में सर्वोपरि ज्वालामुखी

शक्ति की देवी के 51 शक्तिपीठों में सर्वोपरि माना जाता है ज्वालामुखी का दरबार। पहाड़ों में विराजने वाली नौ देवियों में से प्रमुख मां ज्वाला देवी का मंदिर हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में स्थित है।


अनवरत जलती है ज्वाला - कहा जाता है कि यहां सती की जिह्वा गिरी थी। इस तीर्थ पर देवी का दर्शन ज्योति के रूप में होता है। पहाड़ों की नौ चट्टानों से आने वाली यह ज्योति बिना किसी ईंधन के अनवरत जलती रहती है। इसलिए ये स्थान ज्वालामुखी के नाम से प्रसिद्ध है। एक दंत कथा के मुताबिक यह मंदिर सतयुग के काल का है। एक ग्वाले ने राजा भूमिचंद्र को सूचना दी कि उसने धौलाधार के पर्वत पर ज्वाला जलती देखी हैउसके बाद राजा भूमिचंद्र ने आकर ज्वाला रूपि देवी के दर्शन किए और यहां एक छोटे से मंदिर का निर्माण कराया। कहा जाता है कि महाभारत के पंच पांडवों ने भी ज्वालामुखी की यात्रा की थी और यहां मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। यहां कुल नौ ज्योत जलती है। मुख्य जोत का नाम महाकाली है जो मुक्ति औ भक्ति प्रदान करने वाली मानी जाती हैं। वहीं कुंड में दर्शन देने वाली अंबिका संतान सुख देती हैं।

गोरख डिब्बी - यहां आने वाले भक्त गोरख डिब्बी का दर्शन जरूर करते हैं। यह एक छोटे से कुंड में निरंतर खौलता रहता है। यह स्थान ज्वालामुखी मंदिर की परिक्रमा में दस सीढ़ियां ऊपर दाईं तरफ है। कहा जाता है यहां नाथ संप्रदाय के गुरू गोरखनाथ ने तपस्या की थी। वे अपने शिष्य नागार्जन के पास डिब्बी रखकर खिचड़ी मांगने गए थे। पर वे वापस नहीं लौटे।
कहा जाता है कि ज्वालामुखी मां की महिमा ध्यानु भगत से सुनने के बाद बादशाह अकबर यहां नंगे पांव आए थे और माता के सम्मान में सोने का छत्र चढ़वाया था। हालांकि माता ने उनकी भेंट स्वीकार नहीं की। उनका छत्र खंडित रूप में आज भी माता के दरबार में है।

कैसे पहुंचे-पहुंचने का आसान रास्ता पंजाब के होशियारपुर शहर से है। होशियारपुर के गोपीपुरा से ज्वालामुखी की दूरी 20 किलोमीटर है। यहां सड़क मार्ग के अलावा रेल मार्ग से पठानकोट जोगिंदर नगर लाइट रेल से ज्वालामुखी रोड नामक रेलवे स्टेशन से भी उतर कर पहुंचा जा सकता है। ज्वाला देवी मंदिर से ज्वालामुखी रोड स्टेशन से 21 किलोमीटर की दूरी पर है। स्टेशन से मंदिर के लिए मिनी बसें मिलती हैं। कांगड़ा शहर से भी बस से ज्वालामुखी पहुंचा जा सकता है।

-    विद्युत प्रकाश मौर्य
(
JWALAMUKHI TEMPLE. HIMACHAL)

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