Monday, January 20, 2014

मणिपुर में संतरे का कटोरा - तामेंगलांग ((04))


हमारी टैक्सी मणिपुरी शाल के कस्बे तुपुल को पार करती हुई नोनी पहुंची। यहां भी चेकपोस्ट था। नोनी नुंगबा तहसील का एक छोटा सा गांव है। जांच औपचारिकताओं के बाद हम आगे बढ़े। करीब 110 किलोमीटर की दूरी पर आया खोंगसांग नामक गांव। स्थानीय महिलाएं सड़कों के किनारे संतरे बेच रही थीं। यह तामेंगलांग जिले का गांव है। यहां से एक रास्ता जिला मुख्यालय तामेंगलांग के लिए जा रहा था। 

तामेंगलांग मणिपुर के नौ जिलों में से एक जिला है जिसे प्रकृति ने अद्भुत सौंदर्य से संवारा है। एक ऐसा जिला जहां सैलानियों की नजर कम पड़ी है। ये मणिपुर का पूर्ण जनजातीय जिला है।
यहां पांच तरह की नागा और कूकी जनजातियां बसती हैं। बल खाती बराक नदी की सुरम्य घाटियां, घने जंगल, पहाड़, झरने, संतरे, हल्दी और दूसरे वनोत्पाद तामेंगलांग की खासियत है। जिले के 40 फीसदी हिस्से में संतरे की खेती होती है। रास्ते में दूर दूर तक संतरे के बगान नजर आते हैं। पूरे मणिपुर का 80 फीसदी संतरा तामेंगलांग जिले में उत्पादित होता है। इसलिए इसे मणिपुर के संतरे का कटोरा कहा जाता है। जिले का अधिकतम तापमान 30 डिग्री और न्यूनतम 4 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है जो संतरे की खेती के लिए आदर्श है।




दिसंबर में आरेंज फेस्टिवल-  हर साल दिसंबर महीने में जिला मुख्यालय में आरेंज फेस्टिवल का आयोजन किया जाता है। इस मेले में बेहतरीन संतरा उत्पादन करने वाले किसानों को पुरस्कृत भी किया जाता है। इस मेले में जिले के 200 से ज्यादा संतरा उत्पादक किसान हिस्सा लेते हैं। जिले किसानों को आर्गेनिक फार्मिंग का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
सरकार की संस्था मणिपुर स्माल फारमर एग्रो बिजनेस कांसोरटियम किसानों को प्रशिक्षण और उनके उत्पादों की मार्केटिंग में मदद के सिलसिले में काम कर रही है। मणिपुर के अलावा संतरे की बड़े पैमाने पर खेती मेघालय में भी होती है, पर इस क्षेत्र के उत्पादित संतरोंकी मार्केटिंग बड़े पैमाने पर नहीं हो पा रही है।


तामेंगलांग जिला देश के उन क्षेत्रों में शामिल है जो देश आजाद होेने के बाद सड़क मार्ग से भी कहीं से नहीं जुड़ा हुआ था। यह जिला 1957 में इंफाल से सड़क मार्ग से जुड़ा। पर आज भी सड़कों की हालत दयनीय है। इन राज्यों में हाईवे की हालत में सुधार होने और रेल नेटवर्क बेहतर होने के बाद तामेंगलांग के संतरे के भी दिन बहुरेंगे।
खोंगसांग से हमारी गाड़ी आगे बढ़ी। चलते चलते बराक नदी पर पुल आया जो काफी जर्जर हाल में था। यहां सभी यात्रियों को उतरना पड़ा। गाड़ी लकड़ी के पुल पर धीरे धीर आगे बढ़ी। यहां नए स्थायी पुल का निर्माण कार्य जारी है।
-विद्युत प्रकाश मौर्य

( तुपुल, नोनी, खोंगसांग, तामेंगलांग, बराक नदी, संतरा, नुनंगबा, TAMENGLONG, ORANGE, MANIPUR, TUPUL )



( IMPHAL TO SILCHAR 4)

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