Saturday, January 11, 2014

पहाड़ी लोगों का दोस्त - असम राइफल्स

देश की सबसे पुरानी पारा मिलिट्री फोर्स होने का गौरव प्राप्त है असम राइफल्स को। पूर्वोत्तर के सात राज्यों में आप जहां भी जाएंगे आपको असम राइफल्स के जवान सुरक्षा में तैनात नजर आएंगे। पटना से गुवाहाटी आते हुए ट्रेन में असम राइफल्स के अधिकारी से मुलाकात हुई थी जो 30 सालों पूर्वोत्तर के अलग अलग राज्यों में अपनी सेवाएं दे रहे थे। कोहिमा में असम राइफल्स के बेस कैंप पर असम राइफल्स की टैग लाइन लिखी है – फ्रेंड्स ऑफ हिल पीपुल तो इंफाल में लिखी है - फ्रेंड ऑफ मणिपुर पीपुल।

मतलब की सिर्फ सुरक्षा नहीं लोगों की दोस्त सेना की भूमिका में है असम राइफल्स। इंफाल में संगाई फेस्टिवल के दौरान असम ऱाइफल्स की प्रदर्शनी लगी हुई थी जिसमें इस पारा मिलिट्री फोर्स द्वारा किए जा रहे जन कल्याण के कार्य बयां किए गए थे। सीमा सुरक्षा के अलावा शांति के दिनों में असम राइफल्स के जवान चिकित्सा शिविर, रक्तदान शिविर लगाते हैं। पहाड़ के लोगों के बीच दोस्ताना छवि बनाने के तहत कई तरह के सेवा के कार्यों में भी जुटे दिखाई देते हैं असम राइफल्स के जवान।

सबसे पुराना पारा मिलिट्री फोर्स -  असम राइफल्स की स्थापना 1835 में ब्रिटिश सरकार की ओर कछार लेवी के नाम से की गई थी। प्रारंभ इसका उद्देश्य स्थनीय जनजातियों को  ब्रिटिश हितों के लिए काबू में रखना था। 1883 में इसका नाम बदल कर असम फ्रंटियर पुलिस हो गया। 1891 में इसका नाम असम मिलिट्री पुलिस कर दिया गया। 1913 में एक बार फिर नया नाम मिला ईस्टर्न बंगाल एंड असम मिलिट्री पुलिस। 1917 में इस फौज का नाम बदल कर असम राइफल्स हो गया। इस फौज की पहले और दूसरे विश्वयुद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका रही। दूसरे विश्वयुद्ध में इसने जापानी सेना को रोकने में जमकर मुकाबला किया।


भारत सरकार के सभी पारा मिलिट्री फोर्स का मुख्यालय दिल्ली में है लेकिन असम राइफल्स का मुख्यालय शिलांग में है। इसके 12 सेक्टर और कुल 46 बटालियने हैं।

असम राइफल्स उग्रवाद और आतंकवाद के खिलाफ लड़ता है साथ ही इसके पास चीन और बांग्लादेश की सीमाओं की रक्षा की भी जिम्मेवारी है। आमतौर पर असम राइफल्स के महानिदेशक इंडियन आर्मी से प्रतिनियुक्ति पर आते हैं।

असम राइफल्स की आफिसियल वेबसाइट - www.assamrifles.gov.in

 - विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com

( ASSAM, RIFLES, HQ DELHI, FORCE ) 

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