Monday, January 27, 2014

कमला सागर - जय काली मां कसबे वाली

त्रिपुरा राज्य का अदभुत मंदिर है कमला सागर में मां काली का। पंद्रहवीं सदी का बना यह मंदिर अब बिल्कुल बांग्लादेश की सीमा पर है। मंदिर के बगल में सुंदर सरोवर है। इस विशाल सरोवर में असंख्य कमल पुष्प खिले हैं। सरोवर के तट पर सामने ऊंचाई की ओर जाती सीढ़ियां काली माता के दरबार की ओर जा रही हैं।  आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है कमला सागर में। कमला सागर में स्थित काली मां के मंदिर को कसबे वाली काली मां भी कहते हैं। आजादी के बाद कस्बा नामक छोटा सा कस्बा तो बांग्लादेश में चला गया पर काली मां का मंदिर हिंदुस्तान में ही रहा। कमला सागर मंदिर के ठीक बगल में बांग्लादेश सीमा की बाड़ लगी है। बाड़ के उस पार बांग्लादेश के नागरिक अपने खेतों में काम करते हुए दिखाई देते हैं।

तब खोल दी जाती है सीमा - साल में एक बार भाद्रपद आमवस्या पर  मंदिर में मेला लगता है। इस पूजा के खास अवसर पर बांग्लादेश के हिंदू परिवारों को भी काली मां के पूजा की अनुमति दी जाती है। यहां तैनात सीमा सुरक्षा बल के जवान इसके लिए खास तौर पर बंग्लादेशी श्रद्धालुओं को रास्ता उपलब्ध कराते हैं। मां काली की पूजा करने के बाद वे श्रद्धालु वापस लौट जाते हैं। दो देशों के बीच सरहदें जरूर बन गई हैं आस्था को दीवार नहीं जुटा कर सकी है। 

काली मां का ये  मंदिर महाराजा धन माणिक्य का कार्यकाल  15वीं सदी में बनवाया गया। धन माणिक्य त्रिपुरा में माणिक्य वंश के सबसे प्रतापी राजा थे, उन्होंने कई मंदिर बनवाए। कहा जाता है ये मंदिर उनकी पत्नी कमला देवी ने बनवाया था। उन्होंने ही मंदिर के पास विशाल पुष्करणी सरोवर भी खुदवाया जिसका नाम महारानी कमला देवी के नाम पर कमला सागर रखा गया। कमला देवी बड़ी ही परोपकारी और सहृदय महारानी थी।कहा जाता है कि उन्होंने अपने राज्य में चली आ रही नरबलि प्रथा को खत्म कराया था।

कमला सागर का ये मंदिर बाकी काली मंदिरों से थोड़ा अलग है। मंदिर में दसभुजा धारी महिषासुर मर्दिनी की प्रतिमा है। साथ में शिव भी स्थापित हैं। हर रोज मां की प्रतिमा का सुरूचिपूर्ण ढंग से श्रंगार होता है। हर साल भाद्रपद आमस्वया के समय यहां बड़ा मेला लगता है। मंदिर का परिसर बड़ा ही मनोरम है। हमारे आटो रिक्शा वाले बताते हैं कि नए साल के मौके पर यहां पिकनिक मनाने वालों की बड़ी भीड़ जुटती है। बाकी साल अगर आप पहुंचे तो यहां अद्भुत आध्यात्मिक शांति का एहसास होता है।

कमला सागर से बांग्लादेश के कस्बा के खेत घर और काम करते हुए लोग दिखाई देते हैं। सीमा के उस पार के रेलगाड़ी की सिटी भी सुनाई देती है। कस्बा बांग्लादेश के चटगांव डिविजन का एक उप जिला है। 

कैसे पहुंचे- कमला सागर की दूरी अगरतला शहर से 28 किलोमीटर है। अगरतला से कमला सागर जाने के लिए नगरजल बस स्टैंड से टैक्सी या बस ली जा सकती है। उदयपुर मार्ग पर बिशालगढ़ से पहले गोकुल नगर स्टैंड पर उतर जाएं।

गोकुल नगर से आटो रिक्शा कमला सागर जाते हैं। रास्ते में मधुपुर नामक गांव आता है। इस मार्ग में त्रिपुरा से आदर्श ग्रामीण परिवेश से साक्षात्कार होता है। आप चाहें तो अगरतला से सीधे टैक्सी बुक करके कमला सागर जा सकते हैं। इससे आपका समय बचेगा। कमला सागर में आपको खाने पीने के लिए एक दो छोटी दुकानें दिखाई देती हैं। कमला सागर में रहने के लिए कोमिला गेस्ट हाउस बना है। मंदिर परिसर में प्रसाद की दुकानें और कैफेटेरिया आदि भी है।


-    विद्युत प्रकाश मौर्य

(KAMLA SAGAR, TEMPLE, BANGLADESH BORDER, BSF, TRIPURA, AGARTALA ) 

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