Thursday, January 23, 2014

कब खत्म होगा मणिपुर में उग्रवाद

इंफाल में सैनिक स्कूल के एक मणिपुरी छात्र के साथ। 
पूर्वोत्तर के कई राज्यों में उग्रवादी संगठन शांत पड़ गए हैं पर मणिपुर में कई संगठन अभी भी उत्पात मचा रहे हैं। कोहिमा के शहीद स्थल वार सिमेट्री में मेरी मुलाकात एक मणिपुरी युवक से हुई। उसने ओडिशा के सैनिक स्कूल में कई साल पढ़ाई की थी। युवक ने कहा, हमारे मणिपुर के गांव गांव सुंदर हैं। पर कई इलाकों में उग्रवाद के कारण बाहर से सैलानी वहां नहीं पहुंच पाते।

मणिपुर में छोटे बड़े करीब तीन दर्जन उग्रवादी संगठन सक्रिय हैं। इनमें कूकी नेशनल आर्मी (केएनए) कूकी नेशनल फ्रंट ( केएनएफ) और कूकी लिबरेशन आर्मी ( केएलए) कूकी नेशनल आर्गनाइजेशन प्रमुख हैं। दूसरे सक्रिय संगठनों में यूनाइटेड रेवोल्यूशनरी फ्रंट’ (यूआरएफ), पीपुल्स रेवोल्यूशनरी पार्टी ऑफ कांगलीपाक और कांगलेई यावोल कानलुप, कंगलीपाक कम्युनिस्ट पार्टी पखांगलाक्पा (केसीपी-पी) प्रमुख हैं। मणिपुर में कूकी जनजाति के लोग भी अलग राज्य की मांग कर रहे हैं।  कूकी लोगों की पुरानी मांग है कि सेनापति जिले के सदर हिल्स अनुमंडल को एक अलग जिला बना दिया जाए जबकि नगा जनजाति के लोग इस मांग का शुरू से ही विरोध कर रहे थे। कूकी जनजाति के संगठन कई बार अपने लिए अलग राज्य की मांग करते हुए आंदोलन की धमकी देते हैं।



साल 2013 की बात करें तो हर महीने राज्य में कहीं न कहीं कोई उग्रवादी वारदात की घटना जरूर सुनने में आई है। अब शासन की कड़ाई के बाद बड़ी संख्या में उग्रवादी संगठनों के सदस्य पकड़े जा रहे हैं या फिर सरेंडर कर रहे हैं। हालांकि राज्य में नागालैंड की तरह शांति वार्ता की प्रक्रिया नहीं शुरू हो सकी है। तीन दर्जन गुटों को शांति प्रक्रिया के लिए एक छतरी के नीचे लाना सरकार के लिए मुश्किल काम है।
राज्य में तीन प्रमुख जनजातियां नागा, कूकी और मैतेई  हैं। मैतेई लोग वैष्णव हिंदू धर्म को मानते  हैं। लंबे समय से चले आ रहे नागा कूकी संघर्ष का खामियाजा मणिपुर के लोगों को भुगतना पड़ा है।
सिलचर तक टैक्सी में साथ सफर कर रहे एक मणिपुर पुलिस के जवान आशावादी नजरिए से कहते हैं। कोई उग्रवादी भी अब अपने बच्चे को उग्रवाद की आग में नहीं झोंकना चाहता। वह चाहता है कि उसकी अगली पीढ़ी मुख्य धारा में जुड़े और अपना भविष्य संवारे।

-    विद्युत प्रकाश मौर्य  
(  (MANIPUR, INSURGENCY, ARMED CONFLICT ) 


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