Saturday, January 4, 2014

शहीदों की चिताओं पर शांति के पुष्प - इंफाल वार मेमोरियल

इंफाल वार सिमेट्री में 
कोहिमा की तरह ही मणिपुर के इंफाल में भी दूसरे विश्व युद्ध की स्मृतियां देखी जा सकती हैं। दूसरे विश्वयुद्ध के समय में यहां भी एक बड़ी लड़ाई लड़ी गई। जापानी सेना के साथ इंफाल के युद्ध में भी सैकड़ों सैनिक शहीद हुए। उनकी याद में बना है इंफाल वार सिमेट्री। यहां कुल 1600 सैनिकों की कब्रें बनी हैं।

 इंफाल के वार मेमोरियल में पहले 950 सैनिकों की कब्र बनाई गई थी। बाद में इंफाल के आसपास में शहीद हुए सैनिकों की कब्र भी लाकर यहीं स्थापित कर दी गई। इसलिए अब कब्रों की कुल संख्या 1600 हो गई है। इंफाल मे यह वार सिमेट्री शहर के मध्य में डीएम कालेज के सामने स्थित है। दूसरे विश्व युद्ध के समय इंफाल बर्मा जाने का सबसे आसान रास्ता था इसलिए ये युद्ध का महत्वपूर्ण केंद्र बन गया था।


इन स्मारकों की व्यवस्था कामनवेल्थ वार ग्रेव कमिशन देखता है। कोहिमा के शहीद स्मारक भी इसी कमिशन के अधीन हैं। यहां शहीदों की चिताओं के बीच फूलों की सुंदर क्यारियां बनी हैं जिसमें खिलते हैं सफेद गुलाब, जो शायद ये संदेश दे रहे हैं कि युद्ध अब और नहीं। 

इस वार मेमोरियल पर बहुत कम लोग पहुंचते हैं, इसका इंतजाम बहुत शानदार है। फूलों की क्यारियों की रखरखाव मनमोह लेती है। देश में जहां कहीं भी वार मेमोरियल हैं उनके रखरखाव का काम कामनवेल्थ वार मेमोरियल ही देखता है। इस तरह का वार मेमोरियल रांची और पुणे में भी मैंने देखा  है। कई बार यहां जिन फौजियों की कब्र बनी है उनकी वर्तमान पीढी़ के लोग ढूंढते हुए यहां आते हैं और अपने पूर्वजों की कब्र पर आस्था के फूल चढ़ाकर जाते हैं। 


अगर आप मणिपुर पहुंचे हैं तो इस वार मेमोरियल को देखने के लिए जरूर पहुंचे। यह दूसरे विश्वयुद्ध की मूक दास्तां सुनाता प्रतीत होता है। 1942 में जब बर्मा के रंगून शहर पर जापानियों ने कब्जा कर लिया तब बड़ी संख्या में भारतीय वहां से भागे थे। कुल चार लाख भारतीय लोगों में से 1 लाख 40 हजार लोग मणिपुर और असम के रास्ते से भागे थे। पर उनमें से लाखों लोग घर नहीं पहुंच सके। रास्ते में भारी बारिश जंगलों में रास्ता भटक जाने और खाने की कमी के कारण रास्ते में भी कालकवलित हो गए। बाद में ब्रिटिश सेना ने मणिपुर के रास्ते से जापानी सेना के खिलाफ मोर्चा संभाला।



कैसे पहुंचे – इंफाल का वार सिमेट्री सुबह 9 बजे से शाम 4.30 बजे तक खुला रहता है। प्रवेश के लिए कोई शुल्क नहीं है। यह इंफाल डिमापुर हाईवे पर शहर से बाहर निकलते समय दाहिनी तरफ एक किलोमीटर की पतली सड़क पर स्थित है। इसके बगल में डीएम कालेज स्थित है।  मणिपुर की राजधानी इंफाल शहर में एक पोलो ग्राउंड भी स्थित है जो देश के सबसे पुराने पोलो ग्राउंड में से एक है।

 -    विद्युत प्रकाश मौर्य (vidyutp@gmail.com ) 

(IMPHAL, MANIPUR, WAR MEMORIAL )

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