Friday, January 17, 2014

इंफाल से जिरीबाम का मुश्किलों भरा सफर ((01))

मणिपुर की राजधानी इंफाल में तो मैं पहुंचा तो था डिमापुर से कोहिमा होते हुएपर मुझे आगे इंफाल से असम के सिलचर पहुंचना था। इंफाल से सिलचर नेशनल हाइवे नंबर 53 से जुड़ा हुआ है। यानी इंफाल पहुंचने के दो रास्ते हैं एक डिमापुर से इंफाल तो दूसरा सिलचर से इंफाल। इंफाल से सिलचर की दूरी 275 किलोमीटर है। 

इंफाल से सिलचर जाने के लिए जिरीबाम पार्किंग ( जिरी पार्किंग) से सुबह में टैक्सियां खुलती हैं। मैंने अपनी सीट एक दिन पहले की बुक करा ली थी। फोर्स की बड़ी टैक्सी थी जो सुबह 8.20 बजे जिरी पार्किंग से खुली। आगे की सीट पर ड्राइवर के बगल में मेरे अलावा एक यात्री और थे। पीछे की दो पंक्तियों में 4 और 4 आठ सवारियां। दो लड़कियां और दो महिलाएं भी थीं सफर की साथी। शुक्र है लंबे सफर में पीछे की सीट पर कोई नहीं बैठा था। वहां बुकिंग का सामान भरा गया था। यानी ये टैक्सी पार्सल ढोने का भी काम करती है। हम सब यात्रियों का लगेज ड्राइवर ने टैक्सी की छत पर सजा कर बांध दिया। यह अच्छा रहा वर्ना आगे देखने में आया कि हर चेक पोस्ट पर साथ में लिए लगेज की चेकिंग भी करानी पड़ती है।

राजधानी इंफाल से जिरीबाम 220 किलोमीटर है। सड़क खराब होने के कारण पूरे दिन का सफर। वहां से सिलचर 55 किलोमीटर और आगे।

 रिश्वत देते हुए बढ़ती है टैक्सी - इंफाल शहर के बाहरी इलाके में मणिपुर पुलिस और वन विभाग का पहला जांच पोस्ट पड़ा। हमारे टैक्सी के ड्राइवर इन दोनों पोस्ट पर रूके और कुछ चढ़ावा देकर आए। बाद में आगे के सफर में दस से ज्यादा ऐसे पोस्ट आए जहां चढ़ावा यानी रिश्वत देते हुए गाड़ी आगे बढ़ती रही। मणिपुर पुलिस का रिश्वतखोर चेहरा। 

सभी गाड़ियां सरकार के परिवहन विभाग को रोड टैक्स तो देती हैं। लेकिन इसके ऊपर लिए जाने वाले इस तरह के पुलिसिया चढ़ावे का भार भी यात्रियों पर ही पड़ता होगा। असम के रहने वाले ड्राइवर के तो रूटीन में शामिल हो गया है हर तय पोस्ट पर तय रिश्वत की राशि देना और आगे बढ़ना। हालांकि हर रिश्वत की रकम देने के बाद वह झुंझला कर पुलिस सिस्टम को कोसता नजर आता है। मजे की बात की इस हाइवे की असली सुरक्षा तो असम राइफल्स, बीआरटीएफ और सीआरपीएफ के जवान करते नजर आए लेकिन उनके पोस्ट पर कहीं रिश्वत का कारोबार नहीं दिखाई दिया।

-    विद्युत प्रकाश मौर्य

( IMPHAL to SILCHAR- 1, JIRIBAM, TUPUL )

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