Saturday, February 15, 2014

पूर्वोत्तर राज्यों में रेलमार्ग का जाल


अगरतला से लमडिंग होते हुए गुवाहाटी पहुंच रहा हूं। लमडिंग तक मीटर गेज में आने के बाद कुछ घंटे बाद यहां से दूसरी ट्रेन मिली है गुवाहाटी के लिए। बिना आरक्षण कुछ घंटे का सफर। जगह मिल गई। परेशानी नहीं हुई। गुवाहाटी से रात को अवध आसाम एक्सप्रेस है। उदघोषणा हुई की ट्रेन रात को 12 बजे खुलेगी। हमारे कोच में बड़ी संख्या में बिहार के शिक्षक हैं जो गुवाहाटी में शिक्षकों के राष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा लेने आए थे। सफर बातों बातों में कट गया। मेरे पास हाजीपुर तक का टिकट है लेकिन पटना जल्दी पहुंचने के लिए मैं बरौनी जंक्शन में ही उतर जाता हूं। पर आगे का सफर थोड़ा मुश्किल होने वाला था। 

अभी पूर्वोत्तर राज्यों की सिर्फ तीन  राजधानियां ही रेल संपर्क से जुड़ी हैं। गुवाहाटी और अगरतला और इटानगर। बाकी पांच राजधानियों तक पहुंचने के लिए टैक्सी या बस का सहारा लेना पड़ता है। भारत सरकार का लक्ष्य 2016 तक सभी राजधानियों को रेल से जोड़ने का था, हालांकि ये पूरा नहीं हो सका।
मणिपुर की राजधानी इंफाल को रेल मार्ग से जोड़ने के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर काम जारी है। असम के रेलवे स्टेशन सिलचर से इंफाल को रेलमार्ग के जरिए जोड़ा जा रहा है। इसके साथ ही सिलचर से मिजोरम की राजधानी एजल को रेल मार्ग से जोड़ने की परियोजना पर काम चल रहा है। लंबे समये से  लमडिंग से सिलचर के बीच मीटर गेज का मार्ग था जो साल 2016 में  ब्राडगेज में बदला जा सका है।
पूर्वोत्तर के एक और बड़े राज्य अरुणाचल प्रदेश की राजधानी इटानगर को रेल से जोडने के लिए रंगिया हारामूती मीटरगेज लाइन को ब्राडगेज में बदला गया। इसके साथ ही हारामूती से इटानगर तक 33 किलोमीटर के ब्राडगेज रेल मार्ग का निर्माण कार्य हुआ। अब इटानगर के पास नाहरालागुन तक दिल्ली से सीधे रेल चलने लगी है। पर मणिपुर के परियोजना में देरी हो रही है। वहीं नागालैंड की राजधानी को रेलमार्ग से जोड़ने के लिए डिमापुर-जुजबा- परियोजना पर साल 2008 में काम शुरू किया गया। पर जमीन अधिग्रहण और कई तरह की दिक्कतों से इस परियोजना में देरी हुई। मेघालय की राजधानी शिलांग और सिक्किम की राजधानी गंगटोक को भी रेल संपर्क से जोड़ने की योजना है।

इसी तरह जिरीबाम इंफाल रेलमार्ग केंद्र सरकार की अंतरराष्ट्रीय महत्व की परियोजना है। ये रेल सिर्फ इंफाल तक नहीं रूकेगी। ये इंफाल से म्यांमार के बार्डर मोरे जाएगी। वहां से म्यांमार में मांडले तक रेल ले जाने की योजना है। इस प्रकार ये अंतरराष्ट्रीय संपर्क का रेलमार्ग होगा। इस रास्ते से म्यांमार और थाइलैंड के साथ व्यापार हो सकेगा। ये दक्षिण एशियाई देशों के साथ संपर्क का अति महत्वपूर्ण रास्ता होगा। न सिर्फ व्यापार बल्कि सैलानियों की आवाजाही के नए रास्ते खोलेगा ये रेल मार्ग। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जिरीबाम-इंफाल रेल परियोजना की आधारशिला 2004 में रखी थी। इसके पूरा होने का लक्ष्य 2014 था जो अब खिसककर 2020 तक पहुंच गया लगता है।

अगरतला दिल्ली से सीधी रेल सेवा - पूर्वोत्तर का सबसे दूर राज्य त्रिपुरा की  राजधानी अगरतला दिल्ली से सीधी रेल सेवा से जुड़ गया है। 31 जुलाई 2016 को रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने अगरतला आनंद विहार के बीच चलने वाली त्रिपुर सुंदरी एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई। हफ्ते में एक दिन चलने वाली इस ट्रेन में एक एसी 2 कोच, 3 एसी 3 कोच, 5 स्लीपर क्लास कोच और 3 जनरल डिब्बे हैं। 14019 त्रिपुर सुंदरी एक्सप्रेस हर गुरुवार को अगरतला से चलेगी। दिल्ली की दूरी यह ट्रेन 46 घंटे 50 मिनट में तय करेगी। त्रिपुरा के लोग 1949 से ही अपने राज्य में रेल संपर्क के लिए संघर्ष कर रहे थे। पर उनकी बहुत देर से सुनी गई। 1951 में एक बहुत बड़ी रैली हुई जिसमें ज्योति बसु, श्रीपाद अमृत डांगे जैसे नेताओं ने त्रिपुरा को रेल नेटवर्क से जोडने की मांग की। 1964 मे त्रिपुरा का धर्मनगर रेल नेटवर्क से जुड़ा। 2008 में अगरतला तक ट्रेन पहुंची पर मीटर गेज। 

अगरतला तक ब्राडगेज ट्रेन का सपना 2016 में साकार हो सका। अब अगरतला से सबरुम तक 110 किलोमीटर लाइन का विस्तार हो जाने के बाद हालात और बेहतर हो जाएंगे। सबरूम से बांग्लादेश का चटगांव शहर सिर्फ 65 किलोमीटर रह जाएगा।   
-    विद्युत प्रकाश मौर्य
( NORTH EAST RAIL, TRIPURA, JIRIBAM ) 

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