Tuesday, January 21, 2014

नूंगबा में दोपहर की मणिपुरी थाली ((05))

 इंफाल जिरीबाम हाईवे पर पांच घंटे के लगातार सफर के बाद दोपहर के दो बज गए हैं। अब पेट में चूहे कूदने लगे हैं और सफर है कि खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। एक छोटा सा कस्बा आता है नूंगबा। गले में आई कार्ड लटकाए एक मणिपुरी युवक गाड़ी को पार्क करने का इशारा करता है। नूंगबा में टैक्सियां भोजन के लिए रुकती हैं। नूंगमा मणिपुर के तामेंगलांग जिले की तहसील है। हमारी टैक्सी मैतेई होटल के सामने रूकी।
यहां के होटल में खाने के मीनू में मछली, चिकेन आदि था। शाकाहारी विकल्प भी मौजूद था। हमने शाकाहारी थाली मंगाई 70 रुपये की थाली। खाने में चावल, गाढी दाल, सब्जी, सलाद आदि था। कोई भी चीज आप चाहें जितना खाएं। यानी खाना अनलिमिटेड। भूख लगी थी सो जमकर खाया। ये परवाह न करते हुए कि आगे भी अभी आधे दिन का सफर टैक्सी से करना है। हमारे साथ चल रही दो बालाओं ने पहाडी रास्ते में उल्टी होने के डर से नहीं खाया। पर हमारे ड्राइवर साहब बडे संयमित ढंग से गाड़ी चला रहे थे सो मैं उल्टी न होने को लेकर आश्वास्त था।



नूंगबा बाजार के इस होटल को एक मणिपुरी ब्राह्मण परिवार चलाता है। ये लोग कबीर पंथियों की तरह गले में कंठी माला धारण करते हैं। पर ये शाकाहारी नहीं होते। पूरा परिवार मिलकर इस होटल को चलाता है। होटल वाले का व्यवहार अच्छा है। खाने के बाद आगे का सफर शुरू हुआ। शाम गहराने लगी। जिरीबाम निकट आने के साथ एक बार फिर अच्छी सड़कों के दर्शन हुए।

रास्ते में एक जगह चेकपोस्ट पर गाड़ी रूकी। वहां मणिपुरी बालाएं अनानास बेच रही थीं। पूरे पूर्वोत्तर में अनानास खूब सस्ता है। मैंने यहां भी अनानास खरीद कर खाया। खाते ही मैं बोला –अरे ये तो खट्टा है। मणिपुरी बाला ने तपाक से जवाब दिया हमने भी कोई चखकर थोड़े देखा है।
जिरीबाम से पहले सड़क थोड़ी बेहतर नजर आई। 

जिरीबाम पहुंचने की आहट नहीं आई थी पर सड़क पर अंधेरा गहरा गया था। जिरीबाम से पहले हाईवे पर आठ किलोमीटर लंबी ट्रकों की लाइन लगी थी।जाम के बीच जंगल में ट्रकों के चालक स्टोव पर अपना भोजन बनाने में व्यस्त थे। हमारे टैक्सी ड्राईवर ने बताया कि यहां सालों भर जाम के हालात रहते हैं। ट्रक खड़े पर थे, पर टैक्सी जैसी छोटी गाड़ियों को रास्ता मिल पा रहा था। इंफाल से जिरीबाम के 220 किलोमीटर के रास्ते में कोई ऐसा बड़ा शहर या कस्बा नहीं आता जहां कोई आवासीय होटल भी हो। शाम को 6 बजे के बाद गाड़ी जिरीबाम पहुंची तो थोड़ी राहत महसूस हुई। हालांकि अंधेरा गहरा चुका था। पर हमारे टैक्सी वाले ने कह दिया कि वह आगे नहीं जाएंगे। हमने किराया सिलचर तक का भरा था सो उन्होंने हमें आगे किसी और टैक्सी वाले हवाले कर दिया। जिरीबाम से सिलचर का रास्ता समतल है। 


-    विद्युत प्रकाश मौर्य
( IMPHAL TO SILCHAR -5, JIRIBAM, NUNGBA, MAITAI HOTEL, TAMENGLONG )

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