Wednesday, January 22, 2014

मणिपुर के अमर शहीद - पाओना ब्रजबाशी


मेजर जनरल पाओना ब्रजबाशी मणिपुर के इतिहास में सबसे बड़े शहीद हैं जिन्होंने ब्रिटिश आर्मी के खिलाफ लड़ते हुए खोंगजोम के युद्ध में अपने प्राणों की आहुति दी। पाओना ब्रजबाशी की विशाल प्रतिमा मणिपुर की राजधानी इंफाल और जिरिबाम शहर में लगाई गई है। हर साल उनकी शहादत को राज्य के लोग बड़ी श्रद्धा से याद करते हैं और उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करते हैं।

मणिपुर दो हजार साल से स्वाधीन राज्य रहा। यहां के राजाओं ने हिंदू वैष्णव धर्म अपनाया था। पर 1891 में अंग्रेजों ने धोखे से मणिपुर को अपने सम्राज्य में मिलाने की कोशिश की। महाराजा चंद्रकीर्ति के मृत्यु के बाद राज कुमारों में एकता के अभाव में ब्रिटिश शासन को मणिपुर पर कब्जा करने का मौका मिल गया। हालांकि ब्रिटिश सेना के नापाक इरादे के खिलाफ मैतेई योद्धा बहादुरी से लड़े पर खेत रहे। 1891 का आंग्ल मणिपुर युद्ध जिसे खोंगजोम युद्ध भी कहते हैं मणिपुर के इतिहास में काफी अहम महत्व रखता है। मेजर जनरल पाओना ब्रजबाशी ने युद्ध में अपनी सेना के साथ अंग्रेजों का बहादुरी से मुकाबला किया। पर 23 अप्रैल को वे शहीद हो गए। पाओना ब्रजबाशी का जन्म 1933 में हुआ था। उन्हें मणिपुर में शहीदे आजम का दर्जा है।



अंग्रेजी सेना ने मणिपुर को तीन तरफ से घेरा था। कोहिमा की तरफ से माओ गेट पर सिलचर की तरफ से जिरिबाम में और बर्मा की ओर से तमू में। अंतिम मुकाबला खोंगजोम में हुआ। खोंगजोम इंफाल से 40 किलोमीटर आगे है। यहां इंफाल से 28 किलोमीटर दूर खेबाचिंग में खोंगजोम वार मेमोरियल का भी निर्माण हुआ है। यहां युद्ध की यादों को संजोया गया है। हर साल 23 अप्रैल को उनकी शहादत को याद किया जाता है।
 आंग्ल मणिपुर युद्ध को भारतीय इतिहास में अति महत्वपूर्ण युद्ध में गिना जाता है। अंग्रेजों के साथ युद्ध में पराजय के बाद 27 अप्रैल 1891 को मणिपुर प्रिंसले स्टेट के तौर पर ब्रिटिश सम्राज्य का अंग बन गया।
-    विद्युत प्रकाश मौर्य
(MANIPUR, SHAHEED, ANGLO MANIPUR WAR ) 





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