Friday, January 31, 2014

ये कोई सरकारी दफ्तर नहीं सब्जी बाजार है...

उदयपुर का सब्जी बाजार। 
त्रिपुरा के छोटे से कस्बे उदयपुर में मुझे के बड़ी सी चार मंजिला बिल्डिंग दिखाई देती है। मुझे दूर से अभास हुआ मानो ये कोई सरकारी दफ्तर होगा। पर आसपास के लोगों ने बताया कि ये स्थानीय सब्जी बाजार है। सब्जी बाजार, यानी गुदरी बाजार, हाट या पेठिया। वहां जाने पर बेतरतीब में लगाई गई दुकानें, सड़ी हुई सब्जियों की बजबजाटहट, पार्किंग का कोई इंतजाम नहीं, गंदी नालियां, सड़ांध जैसी तस्वीर उमड़ती है। पटना के मुख्य बाजार की सड़क सब्जी बाजार से निकलने वाली दिनभर की गंदगी से जाम हो जाती है। पर यहां वैसा नजारा नहीं था।
सब्जी बाजार के भवन के मुख्य द्वार से अंदर दाखिल होने पर सब कुछ करीने से सजा नजर आया। हरी सब्जियों का अलग बाजार, मछली, मांस, मुर्गे की अलग लाइन, अनाज की दुकानों की अलग लाइन। सब्जियों के अवशिष्ट को फेंकने के लिए बेहतर इंतजाम। हर दुकानदार को पक्की दुकान आवंटित की गई है। अपनी दुकान बंद करके घर चले जाएं। अगले दिन तय समय पर आकर अपनी दुकान खोलें। 
उदयपुर- माताबाड़ी मंदिर का बाजार । 
यानी त्रिपुरा सरकार ने हाट बाजार में खुले में सामान बेचने वालों के लिए बहुमंजिला बाजार बनाकर दिया है। ऐसे बाजार सिर्फ उदयपुर में ही नहीं बल्कि हर जिला मुख्यालय और उप जिला मुख्यालय में बनाए गए हैं। यहां दुकानदारों को अपनी दुकान के लिए किराया भरना पड़ता है पर वह लोगों को भारी नहीं लगता। इतने अच्छे इंतजाम जो हैं। दुकानदारों के लिए टायलेट और मंडी बोर्ड के दफ्तर भी इन भवनों में बनाए गए हैं।
इतना ही नहीं हर पंचायत में भी स्थानीय सब्जी बिक्रेताओं के लिए पक्के शेड बनवाए गए हैं। जहां वे बारिश की परवाह किए बिना बेतकल्लुफ होकर सब्जियां बेच सकते हैं। यानी आम आदमी के दुख दर्द का पूरा ख्याल रखने की कोशिश सरकार ने की है।
ग्रामीण सब्जी बाजार की ये जो परिकल्पना है इससे दूसरे राज्यों को प्रेरणा लेने की जरूरत है। भले की लोग गुजरात के नरेंद्र मोदी के विकास के माडल का हवाला देते हों पर गांवों में पक्की सड़कों के निर्माण में त्रिपुरा गुजरात से आगे निकल चुका है। त्रिपुरा के तमाम गांव पक्की सड़कों से जुड गए हैं। गुजरात के विकास का बार बार ढोल पीटा जाता है पर वहां के गांवों की तमाम सड़कें अभी कच्ची हैं और वहां ध्वनि और वायु प्रदूषण फैलाने वाले छकड़े चलते हैं। त्रिपुरा के लगभग हर पंचायत का अपना पक्का भवन है। पंचायत संकुल में चिकित्सालय का भवन, सरकारी कर्मचारी का भवन बना है। 

मधुपुर के पंचायत भवन में वाचनालय भी है। यहां गांव के लोग बांग्ला का अखबार पढ़ते दिखाई दिए। हर पंचायत भवन के पास एक सीपीएम का पार्टी दफ्तर भी दिखाई देता है। इससे ये पता चलता है कि पार्टी का कैडर जमीनी स्तर पर कितना मजबूत है। स्कूलों का पक्का भवन है। उसमें पेयजल के लिए पानी की टंकी और नलके और शौचालय का भी इंतजाम दिखाई देता है। 

-    विद्युत प्रकाश मौर्य
VEGETABLES  MARKET AGARTALA  TRIPURA  )



No comments:

Post a Comment