Thursday, February 13, 2014

यादों में रचा बसा रहेगा अगरतला

त्रिपुरा का एक गांव। 
 मेरी वापसी की ट्रेन अगरतला लमडिंग एक्सप्रेस है जो यहां से शाम को 4 बजे खुलती है। अगरतला रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक पर खूबसूरत बाजार सजा है। आप अपनी जरूरत की कोई चीज नहीं खरीद सके हैं तो यहां से खरीद सकते हैं।
त्रिपुरा का स्वर्णकाल आया - 
ट्रेन में त्रिपुरा स्टेट राइफल्स के एक जवान मिले। बताया कि अभी त्रिपुरा विकास के सोन काल ( स्वर्ण काल) से गुजर रहा है।  1993 से 2005 के बीच राज्य के हालत बहुत बुरे थे। उग्रवादी संगठनों का ऐसा आतंक था मैं अपने गांव में भी नहीं जा सकता था। आज आप बेधड़क किसी भी गांव में जा सकते हैं। त्रिपुरा तीन ओर से बांग्लादेश से घिरा है। सीमा पर तार की बाड़ लगाई जा रही है। पर कई जगह सीमा अभी भी खुली हुई है जिससे बांग्लादेश की तरफ से घुसपैठ हो जाती है। वैसे सीमा पर बीएसएफ के जवान तैनात रहते हैं। मैं आज ही अखबार में बीएसएफ के महानिदेशक मि. जोशी का बयान पढ़ रहा हूं कि तीन साल में बांग्लादेश की ओर से घुसपैठ कम हुई है।
उज्जयंत पैलेस में एक कलाकृति। 
ट्रेन में हमारे साथ गुवाहाटी तक जा रहे नाई गोपाल देबनाथ कहते हैं कि त्रिपुरा के लोग अपने हक के लिए लड़ना जानते हैं। मीटर गेज को ब्राडगेज में बदलने का काम तेज करने के लिए लोगों ने संघर्ष किया। अब राज्य के आखिरी छोर सबरूम तक ब्राडगेज लाइन के निर्माण का काम जारी है। आप अगली बार त्रिपुरा आएंगे तो उदयपुर, गोमती जिले के पर्यटक स्थलों की सैर और सबरूम तक रेल से जा सकेंगें। ट्रेन आगे बढ़ती जा रही थी। जिरानिया, कुमारघाट, अंबासा और फिर धर्मनगर। धर्मनगर में हमने रात का खाना स्टेशन की कैंटीन से लिया। 40 रुपये में चावल, दाल और सब्जी का पैक्ड डिनर। विकास की राह पर सरपट दौड़ता छोटा सा राज्य त्रिपुरा पीछे छूटता जा रहा था। लेकिन अगरतला तो यादों में बसा रहेगा।
रात का समय है ट्रेन असम में प्रवेश कर चुकी है। अचानक सहयात्री कहते हैं कि ट्रेन की खिड़कियां बद कर दें। मैं खिड़की से रात में भी नजारे देखना चाहता था, पर लोगों ने समझाया, असम आ गया है...कई बार लोग बाहर से ढेले आदि मार कर ट्रेन पर हमला कर देते हैं। बाद अखबारों में पढ़ा कि डिमा हसाओ जिले में पिछले साल ट्रेन पर हुए उग्रवादी हमले के बाद रात में ट्रेनों का परिचालन बंद कर दिया गया था। हालांकि अब रात में रेल गाड़ी चल रही है।
-    विद्युत प्रकाश मौर्य
( AGARTALA, RAIL JOURNEY, GOOD TIMES ) 


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