Wednesday, February 12, 2014

अगरतला की हावड़ा नदी को बचाएं

अगरतला शहर के बीचोंबीच बहती हावड़ा नदी। 
वैसे तो नदियां जीवन दायनी होती हैं। इसलिए तो देश के तमाम बड़े शहर नदियों के किनारे ही बसे थे। नदियों का जल हमारे जीवन की तमाम जरूरतें पूरी करते हैं। छोटा सा शहर अगरतला और उसके बीच बहती है छोटी सी हावडा नदी। इसे स्थानीय भाषा में हरोआ नदी भी कहते हैं। लेकिन हावड़ा नदी जीवन दायिनी नहीं रह गई है। नदी का पानी गंदला हो चुका है। पीने, नहाने लायक नहीं रह गया है। 
नदी अगरतला और उसके आसपास के गांवों के लिए जल का बड़ा स्रोत है। लेकिन नदी का पानी इतना प्रदूषित हो चुका है कि वह पीने लायक नहीं रह गया है। पूरे अगरतला शहर के पानी की जरूरतें पूरी करती है हावड़ा नदी। न सिर्फ अगरतला बल्कि बांग्लादेश की सीमा में चंपकनगर तक पानी हावड़ा नदी से लिया जाता है। हावड़ा नदी त्रिपुरा की दस प्रमुख नदियों में से एक है। ये नदी बारामूरा इलाके से निकल कर आती है। भारत में 53 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद नदी बांग्लादेश में चली जाती है।
हावड़ा नदी के पुल के पास नेताजी की मूर्ति। 
हावड़ा नदी के पानी को अगरतला नगरपालिका साफ करके पीने के लिए सप्लाई करती है। इसके लिए शहर में जोगेंद्र नगर और गांधीघाट में दो वाटर टैंक बनाए गए हैं। किसी जमाने में नदी का पानी बिल्कुल साफ हुआ करता था। पर अब पानी बिल्कुल गंदला हो चुका है। इस पानी को बिना कई स्तरों पर स्वच्छ किए हुए पीना तो दूर नहाने की बात भी नहीं सोची जा सकती है। नदी के किनारे बसावट ने पानी को गंदा कर दिया है। राज्य के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने हावडा नदी के पानी पर जो अध्ययन किया है उसके मुताबिक पानी में प्रदूषण का स्तर बहुत खतराक स्थिति तक पहुंच गया है। नदी के किनारे बसने वाली गरीब आबादी नदी के पास कच्चे शौचालय बनाती है। इसी नदी के पानी में घर की गंदगी भी डाली जाती है। इसलिए नदी का पानी हानिकारक स्तर पर प्रदूषित हो गया है।
प्रदूषण विभाग की नदी का पानी किसी भी काम के लायक नहीं रह गया है। रिपोर्ट कहती है कि नदी के संरक्षण के लिए जरूरी किया जाना समय की मांग है। हमारा दायित्व बनता है कि हम इस छोटी सी नदी को जो  सुंदर से राज्य की राजधानी की जीवन रेखा है इसके जल को संरक्षित करने के तमाम जरूरी उपाय करें।

-     विद्युत प्रकाश मौर्य  
( AGARTALA, HOWRAH RIVER, DIRTY WATER ) 

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