Saturday, February 8, 2014

उज्जयंत पैलेस – यहां देखिए त्रिपुरा का इतिहास

त्रिपुरा शहर का सबसे प्रमुख दर्शनीय स्थल है उज्जयंत पैलेस। सफेद रंग का ये महल अपनी भव्यता में देश के कई बड़े राजमहलों को मात देता प्रतीत होता है। इस पैलेस में हाल तक त्रिपुरा राज्य की एसेंबली यानी विधानसभा हुआ करती थी पर अब नई एसेंबली बन जाने के बाद पैलेस में त्रिपुरा स्टेट म्यूजियम शिफ्ट कर दिया गया है।

पैलेस के मुख्य द्वार पर प्रवेश टिकट खरीदने के साथ आप किला और संग्रहालय दोनों का आनंद ले सकते हैं। मुख्य द्वार के दोनों तरफ दो विशाल तालाब बने हैं जो मुगलकालीन निर्माण शैली की याद दिलाते हैं। किले का भवन दो मंजिला है। इसे महाराजा राधा किशोर माणिक्य ने बनवाया था। उन्हें आधुनिक त्रिपुरा का निर्माता माना जाता है।

उज्जयंत पैलेस का निर्माण 1901 में हुआ था। किले में तीन गुंबद हैं। तीनों की ऊंचाई 86 फीट है। किले के निर्माण में लकड़ी की छतों का सुंदर इस्तेमाल देखने को मिलता है। किले के चारों तरफ चार मंदिरों का भी निर्माण कराया गया है।

हरित परिसर में तालाब के किनारे मूर्तिकला के भी कुछ सुंदर नमूने देखे जा सकते हैं जो त्रिपुरा की कलाप्रेमी आवाम से आपको रूबरू कराते हैं। त्रिपुरा अंग्रेजी राज में प्रिंसले स्टेट हुआ करता था।

देश आजाद होने के बाद 9 सितंबर 1949 को तत्कालीन महारानी कंचनप्रभा देवी और भारत सरकार के बीच हुए समझौते के बाद ये राज्य भारत सरकार का अंग बना। कंचन प्रभा देवी वैसे मध्य प्रदेश के पन्ना की राजकुमारी थीं जो त्रिपुरा में ब्याही गई थीं। हालांकि त्रिपुरा का राजघराना आदिवासी समुदाय से आता है।  
चित्रों में पूर्वोत्तर के विकास की कहानी -
अब किले के भवन की दोनों मंजिलों संग्रहालय बनाया गया है। इस संग्राहलय में मानव विकास की कहानी, पूर्वोत्तर के राज्यों के बारे में जानकारी देती तस्वीरें लगी हैं। यहां तस्वीरों में आप पूरे त्रिपुरा का इतिहास देख सकते हैं। राज्य के सभी दर्शनीय स्थलों के बारे में जानकारी ली जा सकती है।


त्रिपुरा के अलग अलग जनजातियों के रहन सहन और पहनावे के बारे में जानकारी देती तस्वीरें अलग अलग गैलरी में सजी हैं। यहां वास्तुकला, पेंटिंग, वस्त्र, सिक्के, आयल पेंटिंग्स, स्केच, जनजातीय चित्रकला आदि के नमूने देखे जा सकते हैं। संग्रहालय की ज्यादातर तस्वीरें हिंदू और बौद्ध संस्कृति से जुडी हैं। इन्हें अगरतला के अलावा उदयपुर, पीलक, राधानगर आदि जगहों से लाकर संग्रहित किया गया है। ज्यादातर वास्तुचित्र यहां नौवीं से 13वीं सदी के बीच के हैं।
यहां शक काल के सिक्के के अलावा त्रिपुरा के महाराजा बीरचंद माणिक्य की ओर चलाए गए सिक्के भी देखे जा सकते हैं।

खुलने का समय - यहां का संग्रहालय सोमवार को बंद रहता है। शेष दिनों में 10 से 5 बजे तक खुला रहता है। संग्रहालय में क्वालीफायड गाइड आपकी सहायता के लिए निःशुल्क उपलब्ध होते हैं। किले के बाहर विशाल हरित परिसर में दाहिनी और बायीं तरफ दो विशाल तालाब बने हुए हैं। इन तालाब से लगे हुए हरे भरे पार्क भी हैं।



संग्रहालय में घूमने के दौरान सचिनदेव बर्मन की आवाज में संगीत हमेशा पार्श्व में बजता रहता है। अब त्रिपुरा टूरिज्म का दफ्तर भी इसी संग्रहालय के परिसर में आ गया है। यहां से आप पूरे त्रिपुरा के बारे में जानकारी ले सकते हैं। 

-    विद्युत प्रकाश मौर्य


 ( UJJAYANTA PALACE, MUSEUM,  AGARTALA, TRIPURA )

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