Monday, February 3, 2014

त्रिपुरा- चाय और रबर के बाद अब बांस की कली

रबर और चाय के बाद अब त्रिपुरा में बांस के बड़े बाजार के दोहन पर जोर दिया जा रहा है। दुनिया के बड़े होटलों में बांस की कली से बने व्यंजनों की लोकप्रिय हैं। अब इस लोकप्रियता को भुनाने के लिए त्रिपुरा सरकार बांस की कली का उत्पादन वाणिज्यक तौर पर करने जा रही है। राज्य सरकार ने पश्चिम त्रिपुरा जिले के बेलबारी स्थित जिरनिया प्रखंड में 60 हेक्टेयर के क्षेत्र का चुनाव किया है जहां वाणिज्यक तौर पर बांस की विशेष किस्में उगाई जाएंगी। राज्य का बांस मिशन इस प्रोजेक्ट के लिए मदद करेगा। त्रिपुरा में देश का सबसे अधिक बांस का उत्पादन होता है। अगर योजनाबद्ध और वैज्ञानिक तरीके से इसका उत्पादन शुरू होता है तो इससे बांस की मांग और आपूर्ति में संतुलन स्थापित होगा और बांस की कली के आयात के नए मौके मिलेंगें।
    राज्य में थाइलैंड में पाए जाने वाले बांस के एक विशेष किस्म - जेंडू कैलेमस - उगाने की योजना है जिससे बेहद लजीज व्यंजन बनते हैं। गोमती जिले के पेरातिया में बांस की कली उगाने के लिए परीक्षण शुरू किया गया है। बांस मिशन में उत्पादन में गांवों के स्वयं-सहायता समूह को शामिल किया जाएगा और उन्हें तकनीकी और आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाएगी।
चीन में बनती थी सब्जी - चीन में करीब ढाई हजार साल से अधिक समय से परंपरागत तौर पर सब्जी के तौर पर बांस की कली का इस्तेमाल किए जाने का प्रमाण मिलता है। बांस की कली न सिर्फ स्वादिष्ट है बल्कि पौष्टिक तत्वों से भरपूर है। जापान में बांस की कली को जंगल से मिलने वाली सब्जियों का बादशाह माना जाता है। पूर्वोत्तर में मंगोल नस्ल के लोगों के बीच लोकप्रिय बांस की कली को अब गैर मंगोल लोग भी पसंद कर रहे हैं।

बांस का औषधीय इस्तेमाल - बांस की कली की विशेषताएं चीन के मिंग वंश के काल में तैयार कंपेंडियम ऑफ मेटीरिया मेडिका में मिलती है। आधुनिक अनुसंधान में भी बांस की कली में कैंसर प्रतिरोध और वजन कम करने से लेकर भूख बढ़ाने जैसी कई तरह की चिकित्सकीय विशेषताएं पाई जाती हैं। इसका उपयोग हाइपर टेंशन, हायपर लिपेमिया और हायपर ग्लायसेमिया जैसी बीमारियों के उपचार में भी किया जाता है।

-    विद्युत प्रकाश मौर्य 
( BAMBOO,   BLOSSOM, TEA , RUBBER, AGARTALA ) 

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