Saturday, February 1, 2014

त्रिपुरा- हम लाएं है तूफान से कश्ती निकाल के

 देशभक्ति के जज्बे से ओतप्रोत गीत हम लाए हैं तूफान से कश्ती निकाल के... इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के। ये गीत त्रिपुरा के मुख्यमंत्री मानिक सरकार पर फीट बैठता है। मानिक सरकार त्रिपुरा के ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने अशांत त्रिपुरा को खुशहाल त्रिपुरा में बदलने का मुश्किल काम कर दिखाया है वह भी बहुत कम समय में।
त्रिपुरा में मानिक सरकार की अगुवाई में वामदल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) का शासन 1998 में शुरू हुआ। तब त्रिपुरा इतना अशांत था कि अगरतला राजधानी के अलावा त्रिपुरा के किसी भी ग्रामीण इलाके में कोई भी बाहरी व्यक्ति बिना सुरक्षा के नहीं जा सकता था। उग्रवाद चरम पर था। एक नहीं कई उग्रवादी संगठन गोलियां बरसा रहे थे। पर मानिक सरकार ने अपनी सूझबूझ और काबिलियत के बल पर इन पर काबू किया और त्रिपुरा को एक शांत राज्य बनाया और त्रिपुरा चल पड़ा विकास के राह पर।

बदल गई राज्य की फिजां - अब 16 साल के माणिक सरकार के शासन काल में त्रिपुरा की फिजां बदल चुकी है। आप अगरतला की सड़कों पर रात दस बजे के बाद बेखौफ घूम सकते हैं। पूरे त्रिपुरा शहर के किसी भी गांव में बिना किसी सुरक्षा के घूमने जा सकते हैं। सुदूर जंगलों के दर्शनीय स्थल सैलानियों की किलकारियों से गुलजार रहते हैं। त्रिपुरा गैस आधारित बिजली उत्पादन में देश के सामने नजीर पेश कर रहा है। तो चाय के नए बगान, रबर की खेती ने राज्य के गांवों में रहने वालों की तकदीर बदल दी है। गांव में सड़कों का विस्तार हुआ है। पंचायतों के चमचमाते भवन बने हैं। गांव गांव में सरकारी डाक्टर पहुंचते हैं। अंग्रेजी के अलावा होम्योपैथिक और आर्युवेदिक चिकित्सालय भी काम कर रहे हैं।

गरीब मुख्यमंत्री होने का गर्व - त्रिपुरा में राज्य सरकार के कर्मचारियों को वेतन अन्य राज्यों की तुलना में कम मिलता है। पर मानिक सरकार मुख्यमंत्री के तौर पर खुद भी बहुत कम वेतन पर काम करते हैं। वे मात्र 10 हजार रुपये मासिक वेतन लेते हैं। उसमें वे 5 हजार रुपये मासिक से काम चलाते हैं। बाकी रूपया पार्टी फंड में दान दे देते हैं। उनकी पत्नी अपने आवास से रिक्सा में बैठकर अपने स्कूल जाती हैं। इन सबके बीच माणिक दादा खुद को गरीब मुख्यमंत्री कहलाने में खुद को गौरवान्वित महसूस करते हैं।

सादगी भर जीवन की बात करते हैं तो हमें गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पार्रिकर और दिल्ली के अरविंद केजरीवाल भी याद आते हैं पर मानिक दादा की सादगी इनसे दो कदम आगे है। उन्होंने त्रिपुरा में समावेशी विकास का ऐसा माडल पेश किया है जिसमें गरीबों, दलितों, पिछड़ों, ग्रामीण और शहरी हर वर्ग के लोगों का खासा ध्यान रखा गया है। इसलिए राज्य में किसी भी वर्ग के लोगों को उनसे शिकायत नजर नहीं आती।

-    विद्युत प्रकाश मौर्य
TRIPURA CHIEF MINISTER  MANIK SARKAR

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