Tuesday, February 4, 2014

परदेस में उसने कहा, मैं भोजपुरी हूं...

माताबाड़ी, उदयपुर में त्रिपुर सुंदर मंदिर में मेरे कंधे में लटके बैग का फीता टूट गया। मैं मुश्किल में पड़ गया। कोई तात्कालिक उपाय चाहिए था। मंदिर परिसर में एक बालक दुकान लगा रहा था। पूजन सामग्रियों की दुकान। मैंने उससे अपनी समस्या बताकर कहा कोई सेफ्टीपिन होगा जिससे मैं अपने बैग को अस्थायी तौर पर बांध लूं। उसने कहा एक नहीं तीन चार ले लो। मेरा काम हो गया। संकट का समाधान हो गया, पर बालक ने सेफ्टी पिन के पैसे लेने से इनकार कर दिया। कहा इतनी छोटी सी राशि क्या लेना। आपका काम तो चल गया ना।

बालक ने मेरी समस्या दूर की थी। इसलिए मैं ये उपकार मुफ्त में नहीं लेना चाहता था। सो मैंने उससे एक सगुन का धागा खरीद लिया। उसने अपना नाम बताया किशोर दास। सातवीं कक्षा में पढ़ाई करता है। साथ में मंदिर में दुकान भी। पूर्ण बंगाली समुदाय में इतनी अच्छी हिंदी कैसे बोल लेते हो। उसने बताया मैं पोगो चैनल रोज देखता हूं। उसके कार्टून चैनलों से हिंदी सीखता हूं। मैं चलने लगा तो किशोर दास ने कहा, मुझे याद रखना। अगली बार त्रिपुर सुंदरी आना तो जरूर मिलना। मैंने भी वादा कर डाला, फिर मिलेंगे।
ये मंदिर नहीं शौचालय है। ( माताबाड़ी के पास ) 


माताबाडी से आगे बढ़कर ब्रह्मावाडी चौराहे पर पहुंचा। यहां एक मोची की दुकान पर अपने बैग के फीते को सिलाई के लिए दे दिया। तुम्हारा नाम क्या है। संजीत रविदास। अचानक वह बोल पड़ा मैं भोजपुरी हूं। भोजपुरी। सुनकर मैं चौंका। उसने बताया मेरे पुरखे बिहार के भोजपुर जिले से आए थे। मेरे घर में अभी भी भोजपुरी बोली जाती है। मेरे जैसे कुछ और परिवार यहां हैं। 
हालांकि संजीत को ये नहीं मालूम कि भोजपुर जिले में उसका घर कहां है। ही अब उसके कोई रिश्तेदार नाते बिहार में हैं जिससे उसका संपर्क हो। कई पीढ़ी पहले आए पुरखों ने बचाकर रखी है तो बस अपनी जुबान। इसके साथ ही सहज गर्व के साथ अपनी उपाधि महान संत रविदास के नाम। चंदन रविदास बंग्ला अंदाज में भोजपुरी बोलते हैं तो काफी प्यारी लगती है।

-    विद्युत प्रकाश मौर्य
(TRIPURA, MATABARI, UDAIPUR, BHOJPURI  ) 

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