Tuesday, November 26, 2013

स्वर्ण भंडार का रहस्य - जो पढ़ ले वो ले जाए सोना

राजगीर में बिंबिसार की जेल और जरासंध के अखाड़ा, मनियार मठ जैसे स्थलों के पास ही स्वर्ण भंडार की गुफाएं हैं। मनियार मठ से आगे बढ़ने पर पहाड़ की ओर दो गुफाएं हैं। इस स्वर्ण भंडार को लेकर कई तरह के गल्प प्रचलित हैं। ऐसा माना जाता है कि यहां अभी भी बड़ी मात्रा में सोना छिपा हुआ है। कहा जाता है कि गुफा के द्वार पर लिखे शिलालेखों के संकेतों को जो समझ जाएगा वह सोने के खजाने के दरवाजे को खोल सकेगा।   

इन गुफाओं का पता वैभर पहाड़ की खुदाई के बाद पता चला। मैं बचपन से स्वर्ण भंडार की कहानियां सुनता रहा हूं। जितने मुंह उतनी बातें। मेरे पिताजी के दोस्त अरविंद कुमार सिंह जो नालंदा के पास जुआफर नामक गांव के रहने वाले थे बचपन में राजगीर के बारे में फंतासी वाली कथाएं सुनाते थे। वे कहते थे मगध के राजा बिंबिसार का स्वर्ण भंडार था यहां। लेकिन उसके ताले की चाबी झील में फेंक दी गई है।

सोन भंडार के पश्चिमी गुफा के दक्षिणी दीवार पर एक दरवाजा और एक खिड़की है। दरवाजे का निचला भाग उपरी भाग से 15 सेंटीमीटर से अधिक चौड़ा है। गुफा की दीवारें पौने दो मीटर तक सीधी हैं। उसके बाद अंदर की तरफ जाती हैं। यहां तहखाने जैसी संरचना नजर आती है। यहां दरवाजे किनारे और सामने की दीवार पर कुछ शिलालेख उत्कीर्ण हैं। इनमें से ज्यादातर की भाषा अस्पष्ट है। इसे पढ़ा नहीं जा सका है।

इस गुफा की खोज सबसे पहले इतिहासकार जेएस कनिंघम ने की थी। गुफा के अंदर दाहिनी दीवार पर छह छोटी छोटी जैन तीर्थंकरों की मूर्तियां हैं। इससे प्रतीत होता है कि इन गुफाओं का निर्माण जैन संन्यासियों ने करवाया होगा। यहां एक विष्णु की प्रतिमा भी मिली थी जो गुप्त कालीन लगती है जिसे नालंदा म्यूजिम में रखा गया है।

-    विद्युत प्रकाश मौर्य

( RAJGIR, GOLD, BIHAR ) 


No comments:

Post a Comment