Sunday, January 12, 2014

इंफाल - गोविंद देव का मंदिर

 मणिपुर के रहने वाले हिंदुओं की आस्था का केंद्र है गोविंद देव जी का मंदिर। बाहर से इंफाल आने वाले श्रद्धालु भी इस मंदिर में जरूर पहुंचते हैं। इस मंदिर में कृष्ण के गोविंदा रूप में प्रतिमा स्थापित है।

मणिपुर बहुत ही पुराना हिंदू संस्कृति वाला राज्य रहा है। राहुल सांकृत्यान अपनी पुस्तक मानव समाज में लिखते हैं कि मणिपुर की राजकुमारी चित्रांगदा से अर्जुन का विवाह हुआ था। हालांकि ये विवाह तीन वर्ष के लिए था ( पृष्ठ -51) इसलिए नटवर नागर कान्हा से मणिपुर वालों का रिश्ता महाभारत कालीन है।
शहर के बिल्कुल मध्य में कांगला किले के परिसर में स्थित गोविंद देव के मंदिर का भवन पीले रंग का बना हुआ है। इस मंदिर के दो गुंबद है। मंदिर के अंदर कृष्ण, राधा, बलराम की मूर्तियां स्थापित हैं। कृष्ण भगवान विष्णु के अवतार हैं तो मंदिर में  विष्णु के और अवतार भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा भी स्थापित की गई है।

राजा नर सिंह ने बनवाया मंदिर - गोविंद देव मंदिर का पहली बार निर्माण मणिपुर के राजा नर सिंह द्वारा 1846 में कराया गया था। लाल ईंट से बना ये मंदिर मध्यकालीन वास्तुकला का सुंदर नमूना है। मंदिर 16.95 मीटर ऊंचा और 18.63 मीटर चौड़ा है। मंदिर के प्रवेश द्वार के साथ एक लंबा गलियारा है जो श्रद्धालुओं को सीधा गर्भ गृह तक ले जाता है।

भूकंप का असर और पुनर्निमाण -   मणिपुर में सन 1868 में आए भूकंप में मंदिर को काफी हानि पहुंची। तब पूरा मंदिर तबाह हो गया था। मंदिर की दीवारों और मूर्तियों को क्षति पहुंची। बाद में मणिपुर के महाराजा चंद्रकीर्ति ने मंदिर को पुराने स्वरूप में ही निर्मित कराया। गोविंद देव मंदिर में सुबह शाम नियमित पूजा अर्चना होती है। भगवान कृष्ण की आरती में पारंपरिक मणिपुरी वाद्य यंत्रों का संगीत सुनने को मिलता है। मणिपुर में ज्यादातर वैष्णव संप्रदाय के हिंदू हैं। उनकी भगवान विष्णु में अगाध आस्था है। हालांकि यहां के वैष्णव हिंदू शाकाहारी नहीं होते।
-    विद्युत प्रकाश मौर्य
( IMPHAL, GOVINDDEV TEMPLE, VISHNU, ARJUNA)

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