Thursday, December 5, 2013

नए राज्यों की मांग - कार्बी आंगलांग और बोडोलैंड

असम से काटकर बोडोलैंड और कारबी आंगलांग राज्य बनाने की मांग समय समय पर उठती रहती है। 1987 में बोडोलैंड का आंदोलन मुखर हुआ। तब असम को 50 -50 में विभाजित करने की मांग उठी थी। बोडो लोग जितना असम में हिस्सा मांग रहे हैं वह पूरे असम का 35 फीसदी है। अगर कार्बी आंगलांग भी अलग कर दें तो 50 फीसदी असम ही बचेगा। लेकिन तब असम का मानचित्र काफी टेढामेढा हो जाएगा।
बोडोलैंड के लोग कोकराझार, धुबड़ी, बोंगाईगांव, बारपेटा, नलबरी, कामरूप, दरांग और शोणितपुर जिले को असम से अलग कर बोडोलैंड बनाने की मांग कर रहे रहे हैं। कई बार बोडोलैंड का आंदोलन हिंसक हो चुका है। हालांकि प्रस्तावित बोडोलैंड के 70 फीसदी नान बोडो लोग नहीं चाहते कि असम का विभाजन हो। बोडो लोगों की आकंक्षाओं के अनुरूप क्षेत्र के विकास के लिए बीच का रास्ता निकाला गया और बोडोलैंड टेरिटेरियल काउंसिल की स्थापना 10 फरवरी 2003 को की गई। बीटीसी का मुख्यालय कोकराझार में है। यानी कोकराझार बोडोलैंड की राजनीति का प्रमुख केंद्र है। न्यूजलपाईगुड़ी से गुवाहाटी जाने के क्रम में बोडोलैंड का ज्यादातर हिस्सा आता है।


अब बात करें कार्बी आंगलांग की। जुलाई 2013 में केंद्र सरकार ने जब अलग तेलंगाना के प्रस्ताव को मंजूरी दी कार्बी आंगलांग की मांग फिर से सुलग उठी। असम के दो जिले कार्बी आंगलांग और दीमा हसाओ को मिलाकर अलग राज्य बनाने की मांग खास तौर पर कार्बी जनजाति के लोग कर रहे हैं। इसके लिए कार्बी पीपुल्स लिबरेशन टाइगर्स बन चुकी है। कार्बी छात्र संघ भी समय समय पर आंदोलन करता है। कार्बी आंगलांग भौगोलिक रूप से असम का सबसे बड़ा जिला है। कार्बी जिले का मुख्यालय दीफू है जो लमडिंग और दीमापुर के बीच का रेलवे स्टेशन है, जबकि दीमा हसाओ का मुख्यालय हाफलौंग में है। 

कार्बी लोगों के आकंक्षाओं का सम्मान करने के लिए कार्बी स्वायत्तशासी परिषद बनाया जा चुका है। लेकिन कार्बी के लोग इतने से संतुष्ट नहीं हैं। बोडो और कार्बी क्षेत्र की जनजातियां अपने समाज में प्रचलित परंपरागत नियम कानूनों के कारण अपनी पहचान को बचाए रखने के लिए अलग राज्य की मांग करती हैं। हालांकि देश में इतने राज्यों का निर्माण व्यवहार में संभव नहीं दिखाई देता।

-    विद्युत प्रकाश मौर्य  
(ASSAM, KARBI ANGLONG, DIPHU ) 

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