Friday, November 22, 2013

राजवैद्य जीवक का आम्रवन विहार


राजगीर में राजवैद्य जीवक का औषधिशाला का अवशेष जरूर देखें। ये विश्व शांति स्तूप की पहाड़ी से ठीक पहले पड़ता है। इसका नाम जीवक आम्रवन विहार है। कदाचित यहां कभी बड़ी संख्या में आम के पेड़ रहे होंगे इसलिए इसका नाम आम्रवन विहार रखा गया होगा। वैसे तो राजगीर की आबोहवा स्वास्थ्य कर है लेकिन जीवन कायह अस्पताल खासतौर पर बेहतर वातावरण में बनाया गया था।

जीवक राजगृह के राजा अजातशत्रु का राजवैद्य थे। उनकी ख्याति दूर दूर तक थी। एक कथा प्रचलित है कि एक बार देवदत्त ने राजगीर प्रवास के दौरान  भगवान बुद्ध को आहत कर दिया। देवदत्त सिद्धार्थ ( गौतम बुद्ध) का चचेरा भाई था। वह किसी कारण से भगवान बुद्ध से नाराज था। आहत भगवान को तब स्ट्रेचर पर लाद कर जीवक के चिकित्सालय में लाना पड़ा था। बुद्ध का जीवक ने उनके घावों पर पट्टियां बांध कर उपचार किया। लंबे  उपचार के बाद उन्हें पूरी तरह स्वस्थ कर दिया। इस दौरान भगवान बुद्ध जीवक की चिकित्साशाला में ही रहे।


बाद में जीवक ने बौद्ध धर्मावलंबियों के निवास के लिए एक विहार का निर्माण कराया। इसका नाम आम्रवन रखा गया। कभी यहां घने आम के पेड़ हुआ करते थे। इस स्थल पर कुछ समय के लिए भगवान बुद्ध भी रहे। कहा जाता है। इसी स्थल पर भगवान बुद्ध उनसे उपदेश लेने के लिए आए थे। इसलिए बौद्ध मतावलंबियों में जीवक आम्रवन विहार को लेकर बड़ी आस्था है।

मगध नरेश बिंबिसार का प्रसिद्ध राजवैद्य जीवक प्रसिद्ध तक्षशिला महाविद्यालय के छात्र रहे थे। तक्षशिला में धनुर्वेद तथा वैद्यक तथा अन्य विद्याओं की ऊंची शिक्षा दी जाती थी। बिम्बिसार ने राजवैद्य जीवक को भगवान बुद्ध की सेवा में नियुक्‍त किया था। जीवक ने गौतम बुद्ध का उपचार करके भी उन्हें ठीक किया था। जीवक आम्रवन में बुद्ध के साथ घूमता था। इस आम्रवन खास तौर पर बुद्ध के लिए बौद्ध विहार बनवाया गाय था। जीवक सभी बौद्ध भिक्षुओं का निःशुल्क इलाज करता था। कहा जाता है कि बहुत से रोगी इसलिए बौद्ध भिक्षु बन गए ताकि वे अपना मुफ्त में उपचार करवा सकें। 486 ईश्वी पूर्व में जिस साल गौतम बुद्ध का देहावसान हुआ उसी साल जीवक का भी 80 साल की आयु में निधन हो गया।
जीवक मगध की नगरवधू शालवती का पुत्र था। शालवती वैशाली की नगर वधू आम्रपाली के मुकाबले में नियुक्त किया गया था। शालवती एक रात्रि का 100 कर्षापण लेती थी जो आम्रपाली से दोगुना था। पर शालवती ने पुत्र पैदा होने पर लोकलाज से उसे कूड़े में फेंक दिया था। पर मगध राज बिंबिसार की उस पर नजर पड़ी तो उसे नया जीवन मिला और उसका नाम जीवक पड़ा। बड़ा होने पर जीवक ने तक्षशिला जाकर आत्रेय से वैद्य विद्या सीखी।

लौटते हुए जीवक ने साकेत में एक सेठ की पत्नी का सफल उपचार किया। राजगृह आने पर उसने राजा के भगंदर रोग को ठीक किया। राजा ने उसे राजवैद्य नियुक्त किया। जीवक औषधीय चिकित्सा, शल् चिकित्सा और मस्तिष्क चिकित्सा का गहन जानकार था। उस समय काशी, कौशल अवंति और वैशाली में उसके टक्कर का कोई वैद्य नहीं था। 

दुनिया भर से बौद्ध परिपथ का भ्रमण करने वाले सैलानी और श्रद्धालु राजगीर आते हैं। वे सैलानी जीवक के आम्रवन विहार में जरूर पहुंचते हैं। चूंकि जीवक प्रसिद्ध चिकित्सक थे इसलिए यहां आने वाले श्रद्धालु अपने सेहत के लिए मंगलकामना करते हैं। साथ ही लोग यहां पर अपनी आस्था प्रकट करने के लिए बड़ी संख्या में मोमबत्तियां प्रज्ज्वलित करते हैं। आप भी यहां एक आस्था की मोमबत्ती जला सकते हैं।

राजगीर का वन प्याज - 
राजगीर में शांति स्तूप के मार्ग पर आप वन प्याज बिकते हुए देख सकते हैं। कहा जाता ये दर्द में काफी लाभकारी है। राजगीर में इसका तेल भी बिकता है जिसे आप खरीद कर ले जा सकते हैं।  

-    विद्युत प्रकाश मौर्य  


(BIHAR, RAJGIR, BUDDHA, NALANDA )

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