Tuesday, December 17, 2013

पूर्वोत्तर में हिंदी के अखबार

गुवाहाटी ऐसा शहर है जहां से हिंदी के अखबार प्रकाशित होते हैं। सेंटिनेल असम का पुराना और प्रतिष्ठित समाचार पत्र है। इसका हिंदी संस्करण सेंटिनेल नाम से ही प्रकाशित होता है। तो पूर्वांचल प्रहरी दूसरा प्रमुख हिंदी अखबार है। इसके मालिक जीएल अग्रवाला हैं। आजकल गुवाहाटी शहर में प्रातः खबर और पूर्वोदय टाइम्स जैसे दो नए हिंदी के अखबार शुरू हो चुके हैं। जिन्होंने दोनों पुराने अखबारों को चुनौती दी है।

सबसे महंगे हिंदी अखबार गुवाहाटी में 

गुवाहाटी से प्रकाशित होने वाले सभी हिंदी के अखबार काफी महंगे हैं। एक कापी की कीमत 7 रुपये हो चुकी है। मैं समझता हूं कि अभी किसी भी शहर में हिंदी के अखबार इतने महंगे नहीं हुए हैं। दिल्ली में अभी 3 से साढ़े तीन रुपये के अखबार मिल जाते हैं। पूर्वोत्तर में अखबारों के पाठक या तो मारवाड़ी, व्यापारी परिवार हैं या फिर यूपी बिहार से गए मजदूर और दुकानदार वर्ग के लोग। इतना महंगा अखबार उनके साथ ज्यादती लगती है। लमडिंग शहर की सड़कों पर सभी हिंदी के अखबार बिकते हुए मिले। पर नागालैंड में कोई हिंदी का अखबार नहीं पहुंचता। पर मुझे इंफाल में कोलकाता का सन्मार्ग दिखाई दिया। पता चला ये हवाई डाक से यहां पहुंचता है। इसी तरह त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में कोलकाता का विश्वमित्र पहुंचता हैं।

पूरे नार्थ ईस्ट में कोलकाता से प्रकाशित द हिंदू की मांग है। पर छह रुपये का द हिंदू कोहिमा में पहुंचकर 11 रुपये का हो जाता है। ऊपर से हॉकर घर पहुंचाने के लिए 4 रुपये और मांगते हैं। यानी एक अखबार 15 रुपये में। बहुत ज्यादती लगती है। लेकिन पढ़ने वाले इतने रुपये देकर भी अखबार खरीदते ही हैं।
हिंदी के कई पत्रकारों ने गुवाहाटी में अच्छा समय गुजारकर अपनी पत्रकारिता में अनुभव और ज्ञान को नई ऊंचाइयां प्रदान की हैं। टीवी के वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार लंबे समय तक गुवाहाटी सेंटिनेल में रहे। मुकेश भूषण ने भी गुवाहाटी में अच्छा वक्त गुजारा। मेरे दो मित्र आनंद सिंह और संतोष सारंग भी गुवाहाटी के अखबारों में कुछ वक्त रहे। आईआईएमसी के साथी अपूर्व कृष्ण की भी गुवाहाटी में पोस्टिंग रही।

-    विद्युत प्रकाश मौर्य ( GUWAHATI, ASSAM, NEWSPAPERS) 
असम में छह उग्रवादी संगठन सक्रिय
गुवाहाटी। असम के वन मंत्री रकीबुल हुसैन ने सोमवार को कहा कि वार्ता विरोधी उल्फा (आई) और एनडीएफबी (एस) सहित छह उग्रवादी संगठन राज्य में सक्रिय हैं और उनके कार्यकर्ताओं की संख्या 760 है। विधानसभा में असम गण परिषद के फणिभूषण चौधरी को दिए मौखिक जवाब में हुसैन ने मुख्यमंत्री और गृह विभाग के प्रभारी तरुण गोगोई की जगह जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अन्य सक्रिय संगठन कार्बी पीपुल्स लिबरेशन टाइगर, कमातपुर लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन, मुस्लिम यूनाइटेड लिबरेशन टाइगर्स ऑफ असम और हरकत उल मुजाहिदीन (असम इकाई) हैं। उन्होंने कहा कि एनडीएफबी (एस) के कार्यकर्ताओं की संख्या सबसे अधिक 300, उल्फा (आई) की 240, केएलओ की 100 और एमयूएलटीए तथा हरकत उल की 40- 40 है। मंत्री ने कहा कि 15 भूमिगत संगठनों ने सरकार के साथ संघर्षविराम समझौता किया है और उनके कार्यकर्ता राज्य के शिविरों में रह रहे हैं। ( 16 दिसंबर  2013 को गुवाहाटी के सभी अखबारों में प्रकाशित खबर )



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